ध्यान बढ़ाने के 5 नियम | Extreme focus| hindi kahaniya | moral stories | Motivational Story

ध्यान बढ़ाने के 5 नियम | Extreme focus| hindi kahaniya | moral stories | Motivational Story
स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - ध्यान बढ़ाने के 5 नियम | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, Motivational Story पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|

मियामोटों मज़ा सी 500 साल बाद आज भी जापान के महानतम तलवारबाज माने जाते हैं मुसाजी पूरी जिंदगी जापान में घूमते रहे। वे 61 टूल्स में यानी वन ऑन वन लड़ाई में अपराजित रहे। वे फाइटर होने के साथ साथ आर्टिस्ट, राइटर और फिलॉसफर भी थे। इसलिए उन्हें जापान का संत कहा जाता है

जीवन के आखिरी दिनों में वे गुफा में रहने चले गए और वहाँ कई महीनों तक एकांत में ध्यान दिया फिर मरने से ठीक एक हफ्ते पहले उन्होंने अपने चहेते शिष्य के लिए एक किताब लिखी डोक जिसका मतलब है ऑटो वॉकिंग अलोन उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में जो कुछ सीखा उन्हें 21 प्रिंसिपल्स में बदल दिया जिसमें से पांच हम इस वीडियो में देखें नहीं ये प्रिन्सिपल्स नए नहीं हैं लेकिन ये सीधे और सटीक है। क्योंकि इसमें के पूरे जीवन का निचोड़ है जो अपने शिष्य को देना चाहते थे।

अगर हम इन में से एक भी प्रिन्सिपल पूरी तरह अपने जीवन में उतार सकें तो हमारा भला हो जायेगा। सबसे पहला प्रिन्सिपल जो मूसा शि देते हैं कि एक्सेप्ट एवरीथिंग जस्ट एवेंटिस एक हार्ड टोल अपनी किताब पावर ऑफ नौ में कहते हैं कि जो भी आपके जीवन में सफल हो रहा है, उसे ऐसे स्वीकार कर लो, जैसे ही आपकी मर्जी से हो रहा है।

वॉट एवर दे प्रेज़ेंट मूवमेंट कंटेन्स एक्सेप्टेड आसिफ यू हैव चूज इन इट थिस विल मिरैक्यूलस लिए ट्रांसफर म्योर होल लाइफ ये सिंपल सी क्रिया आपके जीवन में बदलाव नहीं बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन लाती है, क्योंकि जो समय आप परेशान होने में या शिकायत करने में लगाते हो, वो समय सचेत रहकर खुद को बेहतर करने में लगा सकते हो। जब आप कहते हो की मुझे डर लग रहा है मुझे बहुत सारे डाउट होते है तो एक्सेप्ट करो की ये फीलिंग ज़ मेरी मर्जी से ही मेरे अंदर टिक्की हुई है।

ये एक्सेप्ट ऐनस ही अवेर्नेस है और अवेर्नेस ही वो स्थान है जहाँ आप रिऐक्शन की जगह ऐक्शन चुन सकते हैं और इस अवेर्नेस के बाद ही आप इस पर काम करना शुरू करते हो। अगला प्रिन्सिपल जो मियामोटों मुंशी देते हैं की टू नो प्ले चक्र को रेस्पोंस एक केवल मज़े के लिए कुछ भी मत करो। मारकस औरिलिअस मेल टेंशन में कहते हैं कि हर दिन खुद से पूछो क्या मेरा जन्म सिर्फ मज़े के पीछे भागने के लिए हुआ है?

क्या मैं अपनी पूरी जिंदगी यूं ही करवा दूंगा? प्लेजर यानी मज़े से गहरा अनुभव है हैपिनेस और हैपिनेस यानी खुशी से गहरा डेढ़ तक रुकने वाला अनुभव है आनंद यानी जॉय केवल मज़े के लिए कुछ करते जाना आपको हमेशा रोकें रहेगा। आप कभी भी किसी भी चीज़ को गहराई से नहीं जान पाओगे, ना ही कभी आप अभ्यास की तरफ अपना ध्यान मोर पाओ गे जितनी भी सेन्स ब्लेज़र्स यानी इंद्रिय सुख है जो देखने खाने पीने से मिलते हैं।

अगर इन्हें प्रायोरिटी दी जाये तो ये ऐडिक्शन में बदल जाते हैं। सच्चाई ये है की हमारे मन के सोर्स में इन्फिनिट, हैपिनेस और आनंद है। जब भी आपकी पसंद की कोई चीज़ आपको मिलती है तो मन कुछ पल के लिए थोड़ा बहुत शांत हो जाता है और अंदर छिपा आनंद मज़े के रूप में सामने आ जाता है और हम को लगता है कि मज़ा बाहर से आया। इस गलतफहमी में जब भी आप अपने से बाहर मज़ा ढूंढ़ते तो आप असली सोर्स को इग्नोर करते हो।

यहाँ सच में आनंद मिलता है और मज़े की प्यास बुझाई नहीं बुझती। आप कितना भी पसंद का खा लो, पी लो पहन लो देखलो सुनलो लेकिन और अच्छे और ज्यादा की कभी खत्म नहीं होती। अगर आपको सच में मज़ा चाहिए तो आपको बस मन को शांत करने की जरूरत है। फिर चाहे वो पेन्ट करना हो या डांस करना, पहाड़ चढ़ना या मार्शल आर्ट्स करना। आपको किसी भी कार्य में मज़ा, खुशी और आनंद आ सकता है। अगली बार जब आप कुछ करने जाओ तो खुद से पूछो।

कि क्या ये काम में केवल मज़े के लिए कर रहा हूँ। अगली बात मूसा सी कहते हैं डू नॉट अन्डर एनी सर्कमस्टान्सेस डिपेंड ऑन ना पार्शियल फीलिंग किसी भी हालात में अधूरी फ़ीलिंग पर निर्भर मत करना या अधूरी फ़ीलिंग पर निर्भर करने की आदत मत बनाओ। हमारे अंदर और बाहर लगातार कई सारी आवाज़ें चल रही है। ये सब मन के चंचल या विचलित होने के कारण है। इस शोर के बीच में हमें जो समझ आता है हम वैसा करने लगते हैं इसलिए कभी खुद पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर पाते।

आपको नहीं पता होता की आप के ऐक्शन का कारण गुस्सा है या इनस्पिरेशन और आप गुस्से को ही इन्स्पिरेशन मान बैठते हो, लेकिन दोनों में अंतर है। गुस्से के कारण आप नई चीजें शुरू तो कर सकते हो लेकिन जारी नहीं रख सकते। उससे के सहारे आप प्रॉब्लम सॉल्व नहीं कर सकते। उसके लिए आपको ठंडा दिमाग चाहिए। इसलिए हमेशा फीलिंग के बारे में अवेयर रही। फीलिंग क्या है? डॉक्टर ऐलन वेट स्किन अपनी किताब को में कहते है की आप अपने शरीर में पैदा हुए

एनर्जी पैटर्न्स को यानी एनर्जी मोशन यानी इमोशन को महसूस कर सकते हो। इस महसूस करने को ही फीलिंग कहते हैं। जब आप कहते हो की मुझे अच्छा नहीं लग रहा तो देखो और पता करो कि आप अपने अंदर एक एनर्जी पैटर्न महसूस कर रहे हो और देखो इसका कारण क्या है? इस कला को माइंडफुलनेस कहते हैं, ये आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यही फीलिंग्स विचारों और ऐक्शन में बदल जाती है और बिना फीलिंग्स के प्रति सचेत हुए आप सेल्फ डाउट और गुस्से को सही दिशा नहीं दे सकते। इसका सबसे अच्छा एग्जाम बिल है जो जिनकी मेंटल टफनेस का कोई जवाब नहीं, वे पिछले 10 साल से मेडिटेशन और माइंडफुलनेस का प्रयोग कर रहे हैं। जोकोविच अपना सबसे अच्छा गेम तब खेलते हैं जब उन्हें कोई डॉमिनेंट करता है या जब हाइ प्रेशर सिचुएशन होती है। इसलिए मूसा सी कहते है की अधूरी फ़ीलिंग पर निर्भर करने की आदत बिल्कुल मत बनाओ।

अगली बात मुंशी कहते है की थिंक लाइटली ऑफ योरसेल्फ ऐनडीपीएल ऑफ द वर्ड अगर आपको केवल अपनी आवाज़ सुनाई देगी तो आप जीवन से कुछ नहीं सीख पाओगे। जब आप खुद को बहुत इम्पोर्टेन्स नहीं देते की मैं क्या सोचता हूँ कि मैं क्या करता हूँ? जब आप बातों को पर्सनली नहीं लेते तब आप जीवन में सीखना शुरू करते हैं। इस असीमित ब्रह्मांड में हम छोटा सा शरीर, छोटा सा इंटलेक्चुअल माइंड और बहुत छोटी सी मेमोरी लेकर चल रहे हैं

इसलिए आप कह सकते हो की ह्यूमैनिटी विनम्रता बहुत अच्छी स्ट्रैटिजी है। विनम्रता की पहचान है की आपको दूसरे लोगों में और अपने आसपास छोटी छोटी चीजों में अच्छा ही दिखने लगती है। जब ऐसा होता है तो आपको बहुत सारे डिटेल्स दिखने लगते हैं, जो अभी तक आपने मिस कर दिए थे। ब्रूस ली ने कहा था की लाइफ इट्सेल्फ इसका टीचर अगर आप सुनने को तैयार हैं तो जीवन स्वयं ही टीचर हैं। इसलिए ह्यूमिनिटी और विनम्रता को हर संस्कृति में महान बताया जाता है।

जितना हम सीखते हैं उतना हमें पता चलता है की हमें तो बहुत कम पता है। इसलिए सबसे लंबा बांस का पेड़ सबसे ज्यादा झुकता है। अगला प्रिन्सिपल जो मुसा सी देते हैं कि डू नॉट रिग्रेट वॉट यू हैव डॉन ऐरो ऑफ टाइम फिज़िक्स में कॉन्सेप्ट होता है जो कहता है की आइटम से लेकर पूरा ब्रह्मांड समय के साथ एक दिशा में आगे बढ़ रहा है। जीवन भी समय के साथ आगे बढ़ता है। केवल आपका ईगो हैं, जो उल्टा भूतकाल में जाने की कोशिश करता है। कूट और काल से याद आया की जिंस आत्मा में गुस्सा और दर्द भरा होता है। उसे प्रेम कहते हैं और ये भी कहा जाता है की प्रेत के पैर उल्टे होते हैं। इस सिम्बोलिज्म का मतलब है कि केवल पिछली गलतियों के बारे में सोचते रहना आपको दुख देता है और आपको आगे नहीं बढ़ने देता। अपनी गलतियों से सीखना अच्छी बात है क्योंकि आप ज्यादा सचेत रहते हो और बेहतर ऐक्शन लेते हो।

लेकिन रिग्रेट इस नॉट इक्वल टु ऐक्शन सिगरेट एक इमोशन है, एक अनियंत्रित विचार है और मुसा की दुनिया में एक अनियंत्रित इमोशन सामुराइ की जान ले सकता है। इसलिए जो भी गलती आपके साथ हुई है या आपके साथ जो भी गलत हुआ है उस पर रिग्रेट नहीं करना चाहिए? नहीं तो जो सीखने लायक बात है वो भी आपको याद नहीं रहे गी। दलाई लामा कहते हैं, वे न्यूज़ डोंट लूज़ तले, सर। तो सवाल ये है कि इन पांच इंटलेक्चुअल प्रिंसिपल्स को प्रैक्टिकल ऐक्शन में कैसे बदले? गो से दूरी बनाकर कोई भी इंटेलेक्चुअल तरीका फिलॉसफी पढ़ना या चर्चा करना आपकी ज्यादा मदद नहीं कर सकते।

ईगो से दूरी बनाने का या अवेर्नेस पढ़ाने का? मेडिटेशन के अलावा दूसरा कोई प्रैक्टिकल तरीका नहीं है। माइंडफुलनेस और डीप ब्रीदिंग भी आपकी मदद करते हैं। जो भी प्रिन्सिपल आपको सबसे पसंद आया हो उसका समरी में से एक स्क्रीनशॉट ले लीजिये और कहीं ऐसी जगह लिख कर रख लीजिये जहाँ आप उसे हर दिन सुबह उठते हुए देख सकूँ। दोस्तों सीढ़ियों को जल्दी से समराइज कर लेते है,

एक्सेप्ट दी थिंग्स जस्ट वेइट् इस जब कभी आपको एडजस्ट होने में दिक्कत आती है या आपका शिकायत करने का मन करता है तो उस फल को उस परिस्थिति को ऐसे एक्सेप्ट कीजिए की जैसे सब आपकी मर्जी से हो रहा है। ऐसा करने से आपकी शिकायत एक्सेप्टेंस में बदल जाएगी और एक्सेप्टेंस अवेर्नेस में बदल जाएगी, जहाँ आपकी ऐक्शन की जगह ऐक्शन चुन सकते हो।

अगला प्रिन्सिपल हे डू नॉट सीट ब्लेजर फॉर इट्स ओन सिंक आनंद का सोर्स आपके अंदर छिपा है। जब इसे इग्नोर करके आप हो तो हमेशा खुशी को ढूंढ़ते ही रहोगे और ये प्रयास कभी नहीं बुझने वाली। आपको केवल मन को शांत करने की जरूरत है। इसलिए आप जो भी करो वो पूरी तरह डूबकर करो।

तीसरा प्रिन्सिपल डू नॉट अन्डर एनी सर्कम्स्टैन्सज़ डिपेंड होना पार्शियल फीलिंग फीलिंग पर निर्भर करने की आदत बिल्कुल मत बनाओ क्योंकि फीलिंग्स आगे चलकर विचार और ऐक्शन में बदलती है। जब आप सचेत रहते हो की आपके अंदर कौन सी फ़िल्म बन रही है तो आप इन्हें स्वीकार करके ही सही दिशा दे सकते हो। अगला प्रिन्सिपल है की थिंक लाइटली ऑफ योरसेल्फ ऐंड डीप्ली ऑफ थे। वर्ड विनम्रता की पहचान है की आपको दूसरे लोगों में और अपने आसपास छोटी छोटी चीजों में अच्छा ही दिखने लगती है। जब ऐसा होता है तो आपको बहुत सारे छोटे डिटेल्स दिखने लगते हैं, जो अभी तक आपने मिस कर दिए थे।

अगला प्रिन्सिपल हैं डू नॉट रिग्रेट वॉट यू हैव डॉन? अपनी गलतियों से सीखना अच्छी बात है। क्योंकि आप ज्यादा सचेत रहते हो और बेहतर ऐक्शन लेते हो। लेकिन इस ईक्वल टू ऐक्शन रिग्रेट एक अनियंत्रित इमोशन और अनियंत्रित विचार है। इसलिए दलाई लामा कहते हैं कि वे नू डू नॉट लूज़ द नेशन।

दोस्तों अगर आपको ये वीडियो पसंद आया तो इन प्रिंसिपल्स को जीवन में उतारने के लिए मेडिटेशन का अभ्यास जरूर करें।

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