जैसा सोचेंगे वैसा ही होगा | jaisa sochoge waisa hi hoga| hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales

जैसा सोचेंगे वैसा ही होगा | jaisa sochoge waisa hi hoga| hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
दोस्तो आज की इस कहानी में आप सभी का स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - जैसा सोचेंगे वैसा ही होगा | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|

आपने यह जरूर सुना होगा कि जो हमें सोचते हैं वो हम बन जाते है, उसे ही आकर्षण कहते हैं। आकर्षण का सिद्धांत एक ऐसा रहस्य है कि यदि हम इसके तथ्य को समझ आए तो ऐसा कुछ भी नहीं रहेगा जो हमारे लिए असंभव हो। यदि हम किसी वस्तु को प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें आकर्षण के सिद्धांत को समझने की आवश्यकता है। जिसप्रकार हमारा दिल धड़कता है। उसी प्रकार हमारे मस्तिष्क में भी कंपन उत्पन्न होती है, जिसके बाहर की और तरंगें प्रसारित होती है। इस प्रकार हम जो भी अपने मस्तिष्क में सोचते हैं


उसी संदेश को मस्तिष्क तरंग बनाकर में छोड़ता है और उसके प्रति में हमें वो वस्तु प्राप्त होती है या फिर वो हमारी और आकर्षित होती है। यदि हम नकारात्मक सोचेंगे तो हमारी और नकारात्मक वस्तुएँ आकर्षित होंगी और यदि हम सकारात्मक सोचते हैं तो सकारात्मक चीजें हमारी और आकर्षित होती है। आकर्षण का नियम कुछ भी नहीं बल्कि हमारी सोच का प्रति आत्म क्रूप है। अर्थार्थ जो भी अपने मस्तिष्क में सोचते हैं, जिंस चीज़ का भी अपने दिमाग में सर्जन करते हैं।


तो हमारा दिमाग भी तरंगें ब्रहमांड में निकालता है और ये तरंगें उसी वस्तु को जिसके बारे में हमने सोचा था, हमारी और आकर्षित करता है। इसे आप तुलसीदासजी के एक दुए से भी समझ सकते हैं जहाँ की रही भावना जैसी प्रभु देखें तैसी अर्थार्थ कोई भी व्यक्ति भगवान को जीस रूप में देखना चाहता है, उसी उसी रूप में भगवान देखते है। इसी प्रकार हम जो भी सोचते हैं हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा आज की दुनिया में केवल 1% लोगों के पास दुनिया का 90% पैसा है।


कभी आपने सोचा है कैसे वो ऐसा कैसे कर पा रहे हैं? क्योंकि वे दिन जात पैसे कमाने के बारे में सोचते हैं और उसके लिए वो काम भी करते हैं तो उन्हें वो ही परिणाम प्राप्त होता है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। आकर्षण के नियम के अनुसार कोई भी अपने जीवन में नेगेटिव और पॉज़िटिव किसी भी चीज़ को अपने अंदर के विचारों और अपने कर्मों के द्वारा अपनी और आकर्षित कर सकता है। ये सिद्धांत आपको बताता है कि दुनिया की हर चीज़ में एक ऊर्जा मौजूद होती है। आकर्षण के नियम के अनुसार आप लोग


जैसी ऊर्जा बाहर छोड़ते हैं यानी की आप ब्रह्मांड में जैसी ऊर्जा छोड़ते हैं वैसी ही ऊर्जा आपको वापस प्राप्त होती है। ये सिद्धांत उसी को मिलता जुलता है जैसी करनी वैसी भरनी। हम जैसे होते है वो सब हमारी सोच और हमारे कर्मों का परिणाम होता है। आज की बोध कहानी को आप पूरा जरूर सुन लेना हो, इसके अंदर आपको एक ऐसी गुप्त विधि बनेगी जिसके अंदर आप 1% लोगों में शामिल हो सकते हो। रेडिओ आपकी जिंदगी बदल देगा। हम आकर्षण के एक ऐसे सिद्धांत को आपको समझाने वाले हैं।


उस सिद्धांत आज तक आपको यू ट्यूब पर कोई नहीं बताया होगा वरना आपने कभी सुना होगा तो चलिए शुरू करते हैं बहुत पुराने समय की बात है। एक में घर के बाहर एक जंगल में एक बहुत रहा करते थे जिससे जंगल में वो रहते थे। वो जंगल दुनिया का सबसे खूबसूरत जंगल था। उस जमाने में सभी लोग खेती किया करते थे और खेती उनका व्यवसाय था और खेती उनके जीवन की अपन करने का एकमात्र सहारा था। वहीं से उन्हें भोजन प्राप्त होता था और वहीं से उन्हें पशुओं के लिए चारा भी प्राप्त होता था।


लेकिन अचानक ही किसी वजह से वहाँ पर अकाल पड़ गया। पानी की एक बूंद भी नहीं बची। सभी फसलें खराब हो गई। लोग भूख के कारण तड़प रहे थे। उन्हें कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करे? फिर उन गांव वालों में एक बुजुर्ग ने गांव वालों से कहा कि हमारे जंगल में जो बहुत भिक्षु रहते हैं, अब वही हमारी समस्या का समाधान कर सकते हैं। वो बड़े आत्मज्ञानी है, उनके पास कोई न कोई हल अवश्य होगा।


तो कहाँ वालों ने ये सुना? उनमे से एक युवक ने बहुत भिक्षु को ढूँढते ढूँढते उनके पास चला गया। जब वहाँ पहुंचा तो बहुत भिक्षु अपनी तपस्या में लीन थे। उस व्यक्ति ने बहुत भिक्षु को प्रणाम किया और वहीं पर बैठ गया। बहुत भिक्षु ने उसे वहाँ आया देखकर उससे पूछा कि क्या हुआ और बताइए कैसे आना हुआ? बौद्ध भिक्षु की बात सुन वो युग बोला, महाराज, हमारे गांव की हालत बहुत खराब है। कई दिनों से वहाँ बारिश नहीं हो रही है। लोगों की हालत खराब हो चुकी है। सब कुछ बर्बाद हो चुका है।


महाराज आज से पहले हमारे गांव में इतना सूखा कभी नहीं पड़ा। लोग भूख प्यास के कारण तड़प रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि सभी लोग भूख प्यास के कारण ही हमारे जाएंगे। अगर ऐसे ही हालात चलते रहे तो पूरा गांव खत्म हो जाएगा। पूरा गांव समाप्त हो जाएगा। अब आप ही कुछ कर सकते हैं। आप उन लोगों को बचा सकते हो क्योंकि मुझे पता है कि आप कोई ना कोई ऐसी विधि उसे जानते हो जिससे कि लोगों की जान बचाई जा सके और बारिश हो सकती है। उस युवक की बात सुनकर वो बहुत


कुछ सोचते हैं और कुछ भी सोचने के बाद भिक्षु ने कहा, ठीक है, मैं तुम्हारी मदद उसे करूँगा। ये कहकर वो बहुत उठे और वहाँ से थोड़ी दूर जाकर खड़े हो गए और हाथ जोड़कर कुछ करने लगे। ये सब जब उस युवक ने देखा तो उसे कुछ समझ नहीं आया की ये बहुत भिक्षु हाथ छोड़कर क्या कर रहे हैं? कुछ देर बाद वह भिक्षु ने कहा, जाओ अब बारिश हो जाएगी। बहुत भिक्षु की ये बात सुनकर उस युवक को बड़ा आश्चर्य हुआ। फिर उसने कहा महाराज


अपने हाथ जोड़कर क्या किया? क्या आपने कोई प्रार्थना की जिससे की बारिश हो जाएगी? युवक की बात सुनकर बहुत भिक्षु मुस्कुराए और युवक से बोले मैंने कोई प्रार्थना नहीं की। बौद्ध भिक्षु की बात सुनकर युवक ने कहा तो फिर आपने इतनी देर खड़े रहकर दोनों हाथ जोड़कर वहाँ क्या कर रहे थे? यह की बात सुनकर बहुत भिक्षु बोले की मैं वहाँ खड़े होकर कोई प्रार्थना नहीं कर रहा था। अगर मैं बारिश के लिए प्रार्थना करता तो बारिश कभी नहीं होती क्योंकि हम बरमान से कुछ भी मांगते हैं या फिर कुछ पाने के लिए प्रार्थना करते हैं।


तो हम उस बर्बाद को ये दिखाते हैं की हमारे पास उस चीज़ की कमी है। हमें उसकी आवश्यकता है। हम उस कमी को दर्शाते हैं और जाने अनजाने में हम उस कमी वाली स्थिति को और भी ज्यादा मजबूत बना देते हैं जिसे हम बदलना चाहते हैं, जो कि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। तुम मुझे ये बताओ की अगर तुम बहुत गरीब हो और तुम किसी से मदद लेने जाओ और उससे कहो कि तुम बहुत गरीब हो और तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है तो क्या वो तुम्हारी मदद करेगा? वो तुम्हारी मदद कभी नहीं करेगा।


क्योंकि उसे पता है कि तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है और तुम उसे कभी वापस लौटा भी नहीं सकते। आप अपनी गरीबी बताकर उसे सायदा ना करने का मौका दे रहे हो और वहीं अगर तुम उसे कुछ ना बताओ और उसे यह कहूं कि तुम्हारे पास किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है और फिर अगर तुम मुझसे मदद मांगोगे तो वो तुम्हारी मदद अवश्य कर देगा क्योंकि उसे पता है कि तुम्हारे पास किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। वो तुम्हारी खुशी खुशी मदद कर देगा क्योंकि अगर हम कमजोर बनकर लोगों से मदद मांगेंगे तो कोई हमारी मदद नहीं करेगा।


अभी अगर हम उसके सामने अपनी कमजोरी प्रदर्शित ना करे तो वो हमारी मदद अवश्य करते हैं। फिर उसके बाद उस बौद्ध भिक्षु ने उस युवक से कहा, ये एक मुक्त विधि है और यह विधि बहुत मूल्यवान है। मैं ऐसे तो किसी को नहीं बताता, लेकिन मैं तुम्हें ये भी बता रहा हूँ ताकि बारिश होने में यदि देरी लग जाए तो तुम इस विधि का उपयोग कर सकते हो क्योंकि कभी कभी हमें बार बार इस विधि का उपयोग करना पड़ता है। बहुत भिक्षु की बात सुनकर वो योग बोला ठीक है महाराज आम मुझे वो बताइए।


फिर वो बोले की विधि मैं तुम्हें बताऊँगा। तुम्हे अगर इस विधि का गलत उपयोग करोगे तो यह विधि काम नहीं करेगी। इसीलिए ध्यान से सुनो और ध्यान से इस विधि को समझना। बहुत भिक्षु बोले की जब मैं तुम से थोड़ी दूर गया तो वहाँ जाने के बाद मैंने कोई प्रार्थना नहीं की, ना कोई निवेदन किया। हाँ, लेकिन मैंने उस समय उस चीज़ को महसूस किया। उस समय को महसूस किया कि बारिश हो रही है और जब बारिश हो रही हो तो मैं उस वक्त कैसा महसूस कर रहा हूँ? उस युवक ने कहा


मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। आप मुझे क्या कहना चाहते है? आप ज़रा मुझे विस्तार से बताइए, आप ने वहाँ जाकर असल में क्या किया? फिर बहुत भिक्षु ने उसे वो को पूरी बात अगर सास से बताई और कहा कि जब मैं वहाँ गया तो नंगे पैर खड़े होकर अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अपने पूर्वजों और अपने देवताओं और पितरों को दिल से पुकारा और उन सबसे कहा कि मुझे आपका साथ चाहिए और उसी वक्त मैंने अपनी आँखों को बंद कर और मैंने देखा कि मेरे गांव में बहुत तेज बारिश हो रही है।


मैं कीचड़ में खड़ा हूँ की धीमी धीमी खुशबू ले रहा हूँ। मैं उसे बारिश में खूब भीग रहा हूँ। उन्हें हरे भरे खेतों को देख रहा हूँ। सभी लोग बारिश में झूम झूमकर रच रहे हैं। पानी की हर बूंद को अपने ऊपर गिरती हुई महसूस कर रहा हूँ। इसके बाद मैंने अपनी खुशियों के लिए उस ब्रह्मांड को धन्यवाद दिया। यह बात सुनकर उस युवक को विश्वास नहीं हुआ लेकिन फिर वो युवक बहुत भिक्षुकों परिणाम करके अपने गांव आ गया। जब वो अपने गांव पहुंचा


उसने देखा कि उसका गांव जो सूखा पड़ा था वो हरा भरा हो चुका है। हर तरफ हरियाली ही हरियाली सब कुछ अच्छा हो गया। हर तरफ से मिट्टी के देने देने खुशबू आ रही सब लोग खुशी से झूम रहे हैं। उसके लिए उस युवक ने अपने पूर्वजों और अपने उस बौद्ध भिक्षु को धन्यवाद दिया। दोस्तों उस बौद्ध भिक्षु ने जो भी किया वो कुछ चमत्कार नहीं था, वो था ओवर अट्रैक्शन जैसे आज भी लोग कर सकते हैं और उस पर बरमाणा का नींद लागू होता है। जिसतरह बताया कि मैंने उस चीज़ को महसूस किया


उस पल को महसूस किया उसे ही आज के वैज्ञानिक और बड़े बड़े महात्मा लोग उपयोग में लेते हैं। जिसे वो जो कुछ भी आते हैं वो उन्हें मिल जाता है। आपने भी सुना होगा कि लोग हमें कहते हैं कि जो आप बनना चाहते हो वो आप महसूस करो, आखिर वो ही बन जाओगे। उसको हकीकत में महसूस करो और फिर ब्रह्मांड को धन्यवाद दो जैसे कि जो लोग सफल होते हैं वो हमेशा सफलता के लिए धन्यवाद अदा करते हैं। उन लोगों को और उस बर्बाद हो जिसकी वजह से वो सफल हुए। बहुत भिक्षु ने भी उस प्रमाण को उस चीज़ के लिए धन्यवाद दिया।


जून के पास नहीं थी लेकिन उन्हें ब्रह्मांड को ये नहीं दिखाया की वो चीज़ उनके पास नहीं है बल्कि उन्होंने तो बर्मन को यह महसूस करवाया कि उनके पास वो वस्तु है और फिर उसी चीज़ को लेकर को धन्यवाद दिया। लेकिन अक्सर लोग क्या करते हैं कि ब्रह्मांड को बस अपनी कमियां बताते रहते है की मैं सफल नहीं हो रहा हूँ। मैं ये नहीं कर पा रहा हूँ। अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पा रहा हूँ। मैं जो भी करता हूँ मेरा सब कुछ बर्बाद हो जाता है। मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ और यहीं नकारात्मक विचार वो ब्रह्मांड को देते हैं।


ब्रह्मांड भी उन्हें ग्रहण करता है। वो सोचता है कि कुछ भी नहीं कर सकता और फिर वो आपकी मदद नहीं करता। लेकिन जब हम ब्राह्मण को ये बताते हैं कि हम सफल इंसान हैं, हम सब कुछ हासिल कर सकता है और अपने लक्ष्य तक उसे पहुंचूंगा तो इस भ्रमण को लगता है की हमे वो शक्ति है, हमने वो पावर है, हम वो कर सकते हैं तो फिर ये बरमाद हमारी सहायता करने में लग जाता है। जब भी हम किसी चीज़ के बारे में महसूस करते हैं और फिर धन्यवाद अदा करते हैं तो इस ब्रह्मांड को लगता है कि आपके पास वो चीज़ है।


आपको और देनी चाहिए और के जिम के अनुसार जैसी ऊर्जा आप ब्रह्मांड को भेजोगे, वैसी ही ऊर्जा आपको ब्रह्मांड वापस भेजेगा। जैसे हालात आपके सामने रखे वैसे ही हालात वो आपको वापस कर देगा। उस बहुत भी यही किया। बारिश को महसूस किया, उस स्थिति को महसूस किया और कुछ दिनों बाद बर्मन ने उसे लौटा दिया। वहाँ पर बारिश हो गई। जैसा उसने महसूस किया था वैसा ही माहौल बन गया। इसलिए अगर आप अपने जीवन में कुछ भी पाना चाहते हो, कुछ भी बनना चाहते हो तो उस चीज़ को महसूस करो।


क्योंकि जब भी हम अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करते हैं तो ये पूरी कायनात हमें सफल बनाने में लग जाती है अगर हम अपने लक्ष्य के लिए मेहनत ही नहीं कर रहे हैं तो हमारा साथ कोई नहीं देगा इसलिए बर्मन को सकारात्मक विचार दो और सकारात्मक विचार ही बरमाणा आपको वापस देगा उम्मीद है ये कहानी आपको पसंद आई होगी और यह विधि भी पसंद आई होगी निधि वीडियो पसंद आया तो वीडियो को लाइक करते है उनको सब्सक्राइब जरूर करना मिलते है अगले वीडियो में तब तक के लिए अपना खयाल

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