दो शक्तिसाली शब्द | do shaktisaali sabd | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
दो शक्तिसाली शब्द | do shaktisaali sabd | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
दोस्तो आज की इस कहानी में आप सभी का स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - दो शक्तिसाली शब्द है | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|
एक समय की बात है, एक नगर का सेट बहुत ही ज्यादा परेशान रहने लगा।
ना तो उसकी दुकान से ही से चलती थी और ना ही उसके घर में किसी भी सदस्य की तबियत ठीक रहती थी। हमेशा ही उसके घर में उसका बेटा या उसकी बेटी या उसकी पत्नी बीमार ही रहती और उसी चिंता में वो धंधे पर ध्यान नहीं दे पाता। इसी वजह से उसकी दुकान धीरे धीरे डाउन होती चली गई। अब सेठ के पास ना तो अच्छा खासा धंधा रहा और ना ही उसके घर में किसी प्रकार की खुशियाँ रही। यही सोचकर वो एक बार अपनी पत्नी को कहता है कि
हमारे घर में किसी ने कुछ करवा दिया है। पक्का हमारे घर में किसी ने कोई टोना टोटका किया है। इसी वजह से हमारे घर की यह दशा हुई है। ना मेरा धंधा चल रहा है ना हमारे घर में किसी की तबियत ठीक रहती है। आखिरी हो क्या रहा है? ऐसा लग रहा है कि पूरी दुनिया का दुख हमें मिला है। उसकी पत्नी हमेशा अपने पति को कहती रहती है की ऐसी बात नहीं है। आदमी के जीवन में दुख और सुख आते रहते हैं। हमें दुख में इतना दुखी नहीं होना चाहिए कि हम
हमेशा दुखी रहेंगे, ऐसी बात नहीं है। दुखाया है तो सुख जरूर आएगा। आप ऐसी बातें ना सोचें लेकिन वो सेठ अपनी पत्नी की बात नहीं मानता था। ऐसे ही सोचते सोचते एक बार उसकी दुकान में एक मारा जाते हैं और वो उनके महाराज के चरणों में गिर पड़ता है और महाराज को कहता है महाराज में जीवन में बहुत दुखी हूँ ना मेरी दुकान अच्छे से चलती है, ना मेरे घर में किसी की तबियत सही से रहती है। पता नहीं ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने मेरे घर को बांध दिया हो।
मेरे घर की खुशियां चली गयी है। वो सेठ उस महाराज को लेकर उनके घर आ जाता है और कहता है महाराज जी आप ज़रा मेरे घर पर नजर घुमाइए। देखिए कि मेरे घर में ऐसा क्या हो गया है कि हमारी खुशियों की किस को नजर लग गई है। वो महाराज बड़ा ही लोग भी था। वो महाराजन नजर घुमाकर देखता है कि उनके घर में एक बहुत ही अच्छी भैस बंधी है जो कि अच्छा खासा दूध दे रही थी। अब महाराज के मन में लालच आ गया।
वो उनसे ठको कहता है कि सेट तो मैं तो 7.5 ही लगी हुई है। तुम्हारे घर में तो बहुत सारे लोगों ने टोने टोटके कर रखा है तुम्हारे धंधे को किसी ने बांध रखा है यह सुनकर वो सेठ कहता है कि महाराज मुझे क्या करना होगा आगे साढ़ेसाती कैसे उतरेगी? उस सन इम राज़ को मुझ से क्या दुश्मनी है? उसके बाद वो महाराज कहता है कि सेठ शायद तुमने दान पुण्य बहुत कम किया है। तुम्हें किसी संत को दान पुण्य करना चाहिए। तभी वह सेठ कहता है कि महाराज जी आप एक संत है।
मैं आप को दान पुण्य कर दूंगा। ज़रा मुझे बताईये कि मैं क्या दान पुण्य करूँ? उसके बाद वो संत कहता है कि देखो सेठ यदि करवाना हो सन इम राज़ का ताला तो दान देना पड़ेगा काला क्योंकि काली भैस थी और संत को पता था कि सेट यदि समझदार होगा तो भैस ही उनको दान देगा। उसके बाद वो सेठ कहता है कि महाराज जी आप अपनी कुटिया में चले, मैं आपके लिए वो दान लेकर आता हूँ। आखिर मेरे घर में क्या चीज़ है? जो काली है मैं वही दान आपके लिए लाऊंगा।
उसके बाद वो महाराज अपनी कुटिया में चले जाते है। अब वो सेट अपने घर में नजर घुमाता है तो उसको भैस नजर आती है। वो जैसे ही अपने भैस को खोलकर ले जा रहा था तभी उसकी पत्नी आंखें सेठ को रोक देती है और कहती हैं कि आप ये क्या कर रहे हो? महाराज ने कहा है कि दान देना काला काला तो हमारे घर में कोयले महाराज ने ये थोड़ी कहा कि भैस लाकर दे ना तभी वो सेठ वो कोयले लेकर महाराज के पास चले जाते है। महाराज देखकर बहुत ज्यादा गुस्से में हो जाते हैं। महाराज कहते हैं कि तुम ये क्या कर रहे हो?
कोयला भला कोई दान देता है क्या? तो सेठ कहता है कि तो फिर मैं क्या लेकर आऊ आपने कहा था कि दान देना काला तभी वो महाराज दूसरी बात बोलता है की ये करवाना हो शनिमहाराज का ताला तो दान देना पड़ेगा काला और चलने फिरने वाला। तभी वह सेठ कहता है कि महाराज जी मैं बिलकुल समझ गया। अब आपके लिए मैं वो ही दान लेकर आता हूँ। भागता हुआ अपने घर जाता है और अपनी पत्नी को कहता है कि तुमने यह क्या किया? उन्होंने दान कोयला नहीं मांगा है। उन्होंने भ्ंस मांगी है।
उन्होंने कहा है कि जी करवाना उस शनिमहाराज कटारा तो दान देना पड़ेगा काला और चलने फिरने वाला। तभी वो पत्नी कहती है कि रुको चलने फिरने वाला ना अभी मैं लेकर आती हूँ वो जोगियों के ढेरों में जाती है और एक सांप पकड़ कर आती है एकदम काला और लाकर सेठ को देती है की ये ले जाकर महाराज को दे दो और वो महाराज जैसे ही सांप को देखते है की वो डर जाते हैं और कहते हैं कि सेठ तुम ये क्या कर रहे हो भला साहब को ही दान देता है तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो, मैं तुम्हारे ऊपर एक और साढ़ेसाती लगवा दूंगा।
उसके बाद सेट कहता है नहीं महाराज ये सब मेरे पत्नी का काम है, वो ही मुझे ये सब बातें बता रही है। अब आप मुझे बताइए कि मैं आपके लिए क्या लेकर आऊ? तभी महाराज तीसरी बात बोलता है की ये करवाना हो सन इम राज़ का ताला दान देना पड़ेगा काला चलने फिरने वाला और दूध देने वाला अब शेर कहता है कि महाराज अब मैं बिलकुल समझ गया मेरे घर में दूध देने वाली एक ही चीज़ है और मैं तुरंत जाकर लेकर आता हूँ। अब वो स्टेट भागते हो जा पाए और अपनी पत्नी को कहता है की तुमने ये क्या कर दिया?
महाराज को नाराज कर दिया। वो हमारे ऊपर एक और साढ़ेसाती लगवा देगा। पत्नी कहता है की आप शांत रहिए। ना तो कोई साढ़ेसाती होती है और ना ही किसी सनी देवता से हमारी दुश्मनी है, वो महाराज बहुत बड़ा लो भी है। अब आपको महाराज ने क्या कहा है? मुझे बताइए। सेठ कहता है की उन्होंने कहा है कि दूध देने वाला तभी वो पत्नी कहती है की रुको, उसके बारे में एक कुतिया भी आई हुई थी और वो बिल्कुल काले थी। वो एक अति गाड़ी के अंदर बच्चों को डालकर सेठ को दे देते है। इसको लेकर महाराज को ले जाकर दे दो।
वो कुतिया अपने बच्चों को ले जाते देख कुतिया भी पीछे पीछे से टक्कर लग गई। अब सीधे महाराज के पास जाकर उतरता है और कहता है ये लोग महाराज चलने फिरने वाला काला भी है, दूध देने वाला भी है, सब है तभी वो महाराज हंसने लग जाते हैं। महाराज कहते हैं, सेठ मुझे पता है कि तुम इतने बड़े ज्ञानी नहीं हो। यदि तुम इतने बड़े ज्ञानी होते तो तुम पहले ही समझ जाते हैं कि ना तो कोई साढ़ेसाती होती है और ना ही हमारे किस्मत को कोई छीन सकता है, यह तुम्हारी पत्नी की करामात है।
और मैं तुम्हारे घर चलना चाहता हूँ।
तभी वो महाराज और वो सेठ दोनों ही सेठ के घर आते है। महाराज उनके घर आकर उनकी पत्नी को कहते हैं कि तुमने अपने मन में ये दृढ़ संकल्प कर दिया कि महाराज को ये बहस दान में नहीं देनी है। मैं भले कितनी भी सेठ को समझाकर भेज, लेकिन तुमने हर बात का कुछ न कुछ मतलब निकाल कर उसका उत्तर तुमने मुझे दिया, इंसान चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता। उसके बाद वो महाराज कहते हैं कि तुमने जो संकल्प लिया है
उस संकल्प को बरकरार रखना अपने मन में हमेशा ये सोच ना की तुम्हारी किस्मत का कोई कुछ नहीं कर सकता, तुम खुद उसके निर्माण दाता हो। आज मैं तुम्हें दो ऐसे शब्द बता रहा हूँ जो इतने ताकतवर होंगे जो तुम्हारी जिंदगी को बदलकर रख देगा क्योंकि तुम्हारे मन में इतना विश्वास हैं तो जरूर ये दो शब्द तुम्हारी जिंदगी बदल देगा। वो महाराज कहते हैं, हमारा मन बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली होता है। बस हमें इस मन को सही से समझना होता है।
हम जो भी चाहते हैं वो हमारे साथ होता है। जब पहली बार तुम्हारे घर में दुकानें शुरू हुए, उसी दिन से तुम नकारात्मकता अपने घर में ले आए, तुम्हारा बच्चा बीमार रहने लगा तो तुम कभी सकारात्मक सोच ही नहीं पाए। हमेशा नकारात्मक बातें सोचते रहे और इसी वजह से तुम्हारे घर में एक के बदले एक दुख आते गए और इसी वजह से तुम्हारा धंधा डाउन हो गया। आज मैं तुम्हें ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली दूध शब्द बता रहा हूँ। इन शब्दों को हमेशा याद रखना
इन शब्दों के बीच में तुम जो भी शब्द डालोगे, वो तुम बन जाओगे और मैं ये बातें तुम्हें इसलिए बता रहा हूँ कि तुम्हारे मन में विश्वास है। तुम्हारी पत्नी के मन में यह विश्वास है और विश्वास ही बड़ी चीज़ होती है। उसके बाद वो महाराज कहते हैं कि दुनिया के ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली शब्द है, मैं हूँ। उसके बाद वह महाराज कहते हैं कि ये दो शब्द ब्रह्मांड के शक्ति, शक्तिशाली शब्द है। इनके बीच में तुम जो कुछ भी शब्द लगाओगे वो तुम बन जाओगे।
यदि तुम्हें इनके बीच में बुद्धिमान लगाना है तो तुम एक बुद्धिमान बन जाओगे। जैसे की मैं बुद्धिमान हूँ, मैं सुखी हूँ, मैं एक महान हूँ, तुम जो भी इनके बीच में लगाओगे वो तुम बन जाओ। अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम्हें करना क्या है। सबसे पहले तुम्हारे मन में जो यह नकारात्मकता घुसी हुई है, उन्हें तुम्हें बाहर निकालना होगा और अपने मन में सकारात्मकता भरनी होगी। उसके बाद ही तुम इस मंत्र को कर पाओगे। हम जब दुखी होते हुए भी
तुर्की का एहसास करते हैं या बातें करते हैं तो हमारा चेतन मन इस बात को नकार देता है। इस बात का विरोध करता है कि हम तो दुखी है, हम अलग कैसे है? तो वो हमारी बात अवचेतन मन तक नहीं पहुंचती है। हमें हमारी बात को उस अवचेतन मन तक पहुंचाना है जैसे की मैं बुद्धिमान हूँ, मैं अमीर हूँ, मैं खुश हूँ इस बात को हमें अवचेतन मन तक लेकर जाना है। तभी तुम जो सोचोगे वो हो पायेगा क्योंकि हम जो सोचते हैं वो इसीलिए नहीं हो पाता है।
क्योंकि हम जो ये बात कहते हैं कि मैं चुकी हूँ, मैं सुखी हूँ तो ये बात चेतन मन तक ही रह जाती है। चेतन मन उन्हें आगे नहीं जाने देता, क्यों नहीं जाने देता? क्योंकि ये गलत बात का विरोध करता है। जब हम दुखी होते हुए भी खुश होने की बात करते हैं तो ये चेतन मन और चेतन मन तक उस बात को जाने ही नहीं देता है क्योंकि ये एक सुरक्षा गार्ड की तरह काम करता है। ये एक सुरक्षाकर्मी है। यदि इसको ये बात गलत लगती है तो ये अवचेतन मन तक नहीं जाने देता और जीस दिन हमने इस बात को अवचेतन मन तक पहुंचा दिया।
जैसे की मैं धनवान हूँ, मैं खुश हूँ उस दिन से जो तुम सोचोगे वो हो जायेगा। अब हमें इस अवचेतन मन तक इस बात को लेकर कैसे जानी है? मैं आपको इसका तरीका बताता हूँ क्योंकि हमारा चेतन मन हमेशा जागृत रहता है। लेकिन उचित नमन उस समय जागृत रहता है। दिन में सिर्फ तीन बार शाम को सोने से पहले और सुबह उठने से पहले और तीसरे ज्ञान के वक्त अब तुम शाम को सोने जाओ तो हमेशा अपने मन में सकारात्मक बातें सोचो।
मैं अमीर हूँ, मेरे घर में सुख शांति है, मेरे घर में सब कुछ सवस्थ चल रहा है, मैं एक सवस्थ हूँ तो भी उठो उस समय भी तुम ये करो, रोज़ 10 मिनट कर सकते हो। मैं तुम्हें कहता हूँ कि तुम एक महीने तक करके देखो, तुम्हारी जिंदगी बदल कर रख देगी। ये इतनी शक्तिशाली शब्द है। बहुत ही कम लोग इनकी ताकत को समझ पाए हैं। जिसने भी इसकी ताकत को जाना है वो इनका इस्तेमाल करके जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। कामयाबी के नए आयाम स्थापित किए हैं।
और तीसरा तुम ध्यान करते वक्त अपने अवचेतन मन तक इस बात को लेकर जाओ क्योंकि तुम्हारा चेतन मन तुम्हें रोक रहा है ये बात करने से लेकिन तुम अपने ध्यान की ताकत से इस बात को अवचेतन मन तक पहुंचा सकते हो और अवचेतन मन तक यह बात पहुंचने के बाद और चेतन मन की ताकत इतनी है कि उसे तुम्हारी जिंदगी में सच साबित कर देगी, लेकिन तुम्हें एकदम सच्चे मन से करना होगा और ऐसा भी नहीं है कि तुम्हें सिर्फ शाम को सोते वक्त सुबह उठने के बाद या दान में ही तुम्हें सकारात्मक रहना नहीं।
पूरे दिन तुम्हें चौबीसों घंटे सकारात्मक ही रहना है। जैसे की जब तुम शाम को सोने जाओ तो ये कहना की मैं धनवान मैं खुश हूँ। मेरे घर में सब सवस्थ हैं। जो भी उठते हो, उसमें भी यही कहना ध्यान में रहते हो तब भी यही कहना लेकिन अब सब दिन तो ये नहीं चलेगा। इसीलिए जीस समय तुम्हारा चेतन मन जाग्रत रहता है क्योंकि जिसमें ध्यान में नहीं रहोगे, उस समय तुम्हारा चेतन मन जागृत रहेगा तो चेतन मन के जागृत रहते हुए भी एक बात कह सकते हो।
मैं धनवान हो रहा हूँ। मुझे धन कमाने के लिए नए नए कार्य मिल रहे हैं। मैं सवस्थ हो रहा हूँ जैसे कि कार्य चल रहा है, इसके बारे में बताना इस बात को तुम्हारा चेतन मन स्वीकार कर लेगा। वो उस बात को नहीं करता है जैसे कि दुखी होते हुए भी हम सुखी बात करते हैं कि हम सुखी है, उस बात को चेतन मैनी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन इस बात को कर लेगा की मैं दवाई खा रहा हूँ और मैं सवस्थ हो रहा हूँ जैसे की आप बीमार हो और आप अपने मन को ये कहो।
बीमार नहीं हूँ तो चेतन मन नहीं मानेगा, लेकिन ये कहूं कि मैं सवस्थ हो रहा हूँ, मैं जो दो वही खा रहा हूँ उससे मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा। इस बात को चेतन मन स्वीकार कर लेगा और उसके बाद ये बात तुम्हारी अवचेतन मन तक पहुँच जाएगी और उसके बाद ही तुम्हारी जिंदगी में चमत्कार हो जाएगा। इन दो शब्दों को तुम सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख गए तो तुम्हारी जिंदगी चेंज हो जाएगी। जैसे मैंने तुम्हें बताया है तुम्हें हमेशा यही करना है और विश्वास रखना।
तुम खुश हो जाओगे, तुम्हारी जिंदगी में खुशियां लौट कर आ जाएगी। तुम्हारी दुकान का धंधा अच्छा चलना शुरू हो जाएगा। विश्वास के साथ कहना जैसे की तुमने जैसे कि तुम्हारी पत्नी के मन में यह विश्वास था कि मुझे दान नहीं देना है तो नहीं देना है। यही विश्वास, यही सकारात्मकता तुम्हारे मन में रखनी है। देखना धीरे धीरे तुम्हारी जिंदगी चेंज हो जाएगी। दोस्तों हमें भी अपनी जिंदगी में इसी तरीके से अपने अवचेतन मन तक इस बात को पहुंचाना है और जीस दिन हमारे अवचेतन मन तक यह बात पहुँच गई
कुछ दिन हमारी जिंदगी चेंज हो जाएगी करके देखना ना की इसमें कुछ पैसा लगता है, ना ही हमें ज्यादा समय लगता है। बहुत ही कम समय लगता है और बहुत ही जल्दी आपको इसका रिज़ल्ट भी मिलना शुरू हो जाएगा क्योंकि बहुत लोगों ने इन्हें अनुभव किया है। बहुत लोगों ने पाया है। इसीलिए इस पर इतनी बात होती है कि जो तुम सोचते हो वो होता है। बहुत बड़े बड़े संत महात्माओं ने यह बात कही है। ऋषि मुनियों ने ये बात कही है तो फिर ये बात झूठी कैसे हो सकती है? हम इसको नकार कैसे सकते हैं? और विश्वास के साथ ये बात करना जरूर आपकी जिंदगी चेंज हो पाएगी? जो आप सोचोगे वही होगा। उम्मीद है यह कहानी आपको पसंद आई होगी और दी हुई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।
दोस्तो आज की इस कहानी में आप सभी का स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - दो शक्तिसाली शब्द है | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|
एक समय की बात है, एक नगर का सेट बहुत ही ज्यादा परेशान रहने लगा।
ना तो उसकी दुकान से ही से चलती थी और ना ही उसके घर में किसी भी सदस्य की तबियत ठीक रहती थी। हमेशा ही उसके घर में उसका बेटा या उसकी बेटी या उसकी पत्नी बीमार ही रहती और उसी चिंता में वो धंधे पर ध्यान नहीं दे पाता। इसी वजह से उसकी दुकान धीरे धीरे डाउन होती चली गई। अब सेठ के पास ना तो अच्छा खासा धंधा रहा और ना ही उसके घर में किसी प्रकार की खुशियाँ रही। यही सोचकर वो एक बार अपनी पत्नी को कहता है कि
हमारे घर में किसी ने कुछ करवा दिया है। पक्का हमारे घर में किसी ने कोई टोना टोटका किया है। इसी वजह से हमारे घर की यह दशा हुई है। ना मेरा धंधा चल रहा है ना हमारे घर में किसी की तबियत ठीक रहती है। आखिरी हो क्या रहा है? ऐसा लग रहा है कि पूरी दुनिया का दुख हमें मिला है। उसकी पत्नी हमेशा अपने पति को कहती रहती है की ऐसी बात नहीं है। आदमी के जीवन में दुख और सुख आते रहते हैं। हमें दुख में इतना दुखी नहीं होना चाहिए कि हम
हमेशा दुखी रहेंगे, ऐसी बात नहीं है। दुखाया है तो सुख जरूर आएगा। आप ऐसी बातें ना सोचें लेकिन वो सेठ अपनी पत्नी की बात नहीं मानता था। ऐसे ही सोचते सोचते एक बार उसकी दुकान में एक मारा जाते हैं और वो उनके महाराज के चरणों में गिर पड़ता है और महाराज को कहता है महाराज में जीवन में बहुत दुखी हूँ ना मेरी दुकान अच्छे से चलती है, ना मेरे घर में किसी की तबियत सही से रहती है। पता नहीं ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने मेरे घर को बांध दिया हो।
मेरे घर की खुशियां चली गयी है। वो सेठ उस महाराज को लेकर उनके घर आ जाता है और कहता है महाराज जी आप ज़रा मेरे घर पर नजर घुमाइए। देखिए कि मेरे घर में ऐसा क्या हो गया है कि हमारी खुशियों की किस को नजर लग गई है। वो महाराज बड़ा ही लोग भी था। वो महाराजन नजर घुमाकर देखता है कि उनके घर में एक बहुत ही अच्छी भैस बंधी है जो कि अच्छा खासा दूध दे रही थी। अब महाराज के मन में लालच आ गया।
वो उनसे ठको कहता है कि सेट तो मैं तो 7.5 ही लगी हुई है। तुम्हारे घर में तो बहुत सारे लोगों ने टोने टोटके कर रखा है तुम्हारे धंधे को किसी ने बांध रखा है यह सुनकर वो सेठ कहता है कि महाराज मुझे क्या करना होगा आगे साढ़ेसाती कैसे उतरेगी? उस सन इम राज़ को मुझ से क्या दुश्मनी है? उसके बाद वो महाराज कहता है कि सेठ शायद तुमने दान पुण्य बहुत कम किया है। तुम्हें किसी संत को दान पुण्य करना चाहिए। तभी वह सेठ कहता है कि महाराज जी आप एक संत है।
मैं आप को दान पुण्य कर दूंगा। ज़रा मुझे बताईये कि मैं क्या दान पुण्य करूँ? उसके बाद वो संत कहता है कि देखो सेठ यदि करवाना हो सन इम राज़ का ताला तो दान देना पड़ेगा काला क्योंकि काली भैस थी और संत को पता था कि सेट यदि समझदार होगा तो भैस ही उनको दान देगा। उसके बाद वो सेठ कहता है कि महाराज जी आप अपनी कुटिया में चले, मैं आपके लिए वो दान लेकर आता हूँ। आखिर मेरे घर में क्या चीज़ है? जो काली है मैं वही दान आपके लिए लाऊंगा।
उसके बाद वो महाराज अपनी कुटिया में चले जाते है। अब वो सेट अपने घर में नजर घुमाता है तो उसको भैस नजर आती है। वो जैसे ही अपने भैस को खोलकर ले जा रहा था तभी उसकी पत्नी आंखें सेठ को रोक देती है और कहती हैं कि आप ये क्या कर रहे हो? महाराज ने कहा है कि दान देना काला काला तो हमारे घर में कोयले महाराज ने ये थोड़ी कहा कि भैस लाकर दे ना तभी वो सेठ वो कोयले लेकर महाराज के पास चले जाते है। महाराज देखकर बहुत ज्यादा गुस्से में हो जाते हैं। महाराज कहते हैं कि तुम ये क्या कर रहे हो?
कोयला भला कोई दान देता है क्या? तो सेठ कहता है कि तो फिर मैं क्या लेकर आऊ आपने कहा था कि दान देना काला तभी वो महाराज दूसरी बात बोलता है की ये करवाना हो शनिमहाराज का ताला तो दान देना पड़ेगा काला और चलने फिरने वाला। तभी वह सेठ कहता है कि महाराज जी मैं बिलकुल समझ गया। अब आपके लिए मैं वो ही दान लेकर आता हूँ। भागता हुआ अपने घर जाता है और अपनी पत्नी को कहता है कि तुमने यह क्या किया? उन्होंने दान कोयला नहीं मांगा है। उन्होंने भ्ंस मांगी है।
उन्होंने कहा है कि जी करवाना उस शनिमहाराज कटारा तो दान देना पड़ेगा काला और चलने फिरने वाला। तभी वो पत्नी कहती है कि रुको चलने फिरने वाला ना अभी मैं लेकर आती हूँ वो जोगियों के ढेरों में जाती है और एक सांप पकड़ कर आती है एकदम काला और लाकर सेठ को देती है की ये ले जाकर महाराज को दे दो और वो महाराज जैसे ही सांप को देखते है की वो डर जाते हैं और कहते हैं कि सेठ तुम ये क्या कर रहे हो भला साहब को ही दान देता है तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो, मैं तुम्हारे ऊपर एक और साढ़ेसाती लगवा दूंगा।
उसके बाद सेट कहता है नहीं महाराज ये सब मेरे पत्नी का काम है, वो ही मुझे ये सब बातें बता रही है। अब आप मुझे बताइए कि मैं आपके लिए क्या लेकर आऊ? तभी महाराज तीसरी बात बोलता है की ये करवाना हो सन इम राज़ का ताला दान देना पड़ेगा काला चलने फिरने वाला और दूध देने वाला अब शेर कहता है कि महाराज अब मैं बिलकुल समझ गया मेरे घर में दूध देने वाली एक ही चीज़ है और मैं तुरंत जाकर लेकर आता हूँ। अब वो स्टेट भागते हो जा पाए और अपनी पत्नी को कहता है की तुमने ये क्या कर दिया?
महाराज को नाराज कर दिया। वो हमारे ऊपर एक और साढ़ेसाती लगवा देगा। पत्नी कहता है की आप शांत रहिए। ना तो कोई साढ़ेसाती होती है और ना ही किसी सनी देवता से हमारी दुश्मनी है, वो महाराज बहुत बड़ा लो भी है। अब आपको महाराज ने क्या कहा है? मुझे बताइए। सेठ कहता है की उन्होंने कहा है कि दूध देने वाला तभी वो पत्नी कहती है की रुको, उसके बारे में एक कुतिया भी आई हुई थी और वो बिल्कुल काले थी। वो एक अति गाड़ी के अंदर बच्चों को डालकर सेठ को दे देते है। इसको लेकर महाराज को ले जाकर दे दो।
वो कुतिया अपने बच्चों को ले जाते देख कुतिया भी पीछे पीछे से टक्कर लग गई। अब सीधे महाराज के पास जाकर उतरता है और कहता है ये लोग महाराज चलने फिरने वाला काला भी है, दूध देने वाला भी है, सब है तभी वो महाराज हंसने लग जाते हैं। महाराज कहते हैं, सेठ मुझे पता है कि तुम इतने बड़े ज्ञानी नहीं हो। यदि तुम इतने बड़े ज्ञानी होते तो तुम पहले ही समझ जाते हैं कि ना तो कोई साढ़ेसाती होती है और ना ही हमारे किस्मत को कोई छीन सकता है, यह तुम्हारी पत्नी की करामात है।
और मैं तुम्हारे घर चलना चाहता हूँ।
तभी वो महाराज और वो सेठ दोनों ही सेठ के घर आते है। महाराज उनके घर आकर उनकी पत्नी को कहते हैं कि तुमने अपने मन में ये दृढ़ संकल्प कर दिया कि महाराज को ये बहस दान में नहीं देनी है। मैं भले कितनी भी सेठ को समझाकर भेज, लेकिन तुमने हर बात का कुछ न कुछ मतलब निकाल कर उसका उत्तर तुमने मुझे दिया, इंसान चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता। उसके बाद वो महाराज कहते हैं कि तुमने जो संकल्प लिया है
उस संकल्प को बरकरार रखना अपने मन में हमेशा ये सोच ना की तुम्हारी किस्मत का कोई कुछ नहीं कर सकता, तुम खुद उसके निर्माण दाता हो। आज मैं तुम्हें दो ऐसे शब्द बता रहा हूँ जो इतने ताकतवर होंगे जो तुम्हारी जिंदगी को बदलकर रख देगा क्योंकि तुम्हारे मन में इतना विश्वास हैं तो जरूर ये दो शब्द तुम्हारी जिंदगी बदल देगा। वो महाराज कहते हैं, हमारा मन बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली होता है। बस हमें इस मन को सही से समझना होता है।
हम जो भी चाहते हैं वो हमारे साथ होता है। जब पहली बार तुम्हारे घर में दुकानें शुरू हुए, उसी दिन से तुम नकारात्मकता अपने घर में ले आए, तुम्हारा बच्चा बीमार रहने लगा तो तुम कभी सकारात्मक सोच ही नहीं पाए। हमेशा नकारात्मक बातें सोचते रहे और इसी वजह से तुम्हारे घर में एक के बदले एक दुख आते गए और इसी वजह से तुम्हारा धंधा डाउन हो गया। आज मैं तुम्हें ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली दूध शब्द बता रहा हूँ। इन शब्दों को हमेशा याद रखना
इन शब्दों के बीच में तुम जो भी शब्द डालोगे, वो तुम बन जाओगे और मैं ये बातें तुम्हें इसलिए बता रहा हूँ कि तुम्हारे मन में विश्वास है। तुम्हारी पत्नी के मन में यह विश्वास है और विश्वास ही बड़ी चीज़ होती है। उसके बाद वो महाराज कहते हैं कि दुनिया के ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली शब्द है, मैं हूँ। उसके बाद वह महाराज कहते हैं कि ये दो शब्द ब्रह्मांड के शक्ति, शक्तिशाली शब्द है। इनके बीच में तुम जो कुछ भी शब्द लगाओगे वो तुम बन जाओगे।
यदि तुम्हें इनके बीच में बुद्धिमान लगाना है तो तुम एक बुद्धिमान बन जाओगे। जैसे की मैं बुद्धिमान हूँ, मैं सुखी हूँ, मैं एक महान हूँ, तुम जो भी इनके बीच में लगाओगे वो तुम बन जाओ। अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम्हें करना क्या है। सबसे पहले तुम्हारे मन में जो यह नकारात्मकता घुसी हुई है, उन्हें तुम्हें बाहर निकालना होगा और अपने मन में सकारात्मकता भरनी होगी। उसके बाद ही तुम इस मंत्र को कर पाओगे। हम जब दुखी होते हुए भी
तुर्की का एहसास करते हैं या बातें करते हैं तो हमारा चेतन मन इस बात को नकार देता है। इस बात का विरोध करता है कि हम तो दुखी है, हम अलग कैसे है? तो वो हमारी बात अवचेतन मन तक नहीं पहुंचती है। हमें हमारी बात को उस अवचेतन मन तक पहुंचाना है जैसे की मैं बुद्धिमान हूँ, मैं अमीर हूँ, मैं खुश हूँ इस बात को हमें अवचेतन मन तक लेकर जाना है। तभी तुम जो सोचोगे वो हो पायेगा क्योंकि हम जो सोचते हैं वो इसीलिए नहीं हो पाता है।
क्योंकि हम जो ये बात कहते हैं कि मैं चुकी हूँ, मैं सुखी हूँ तो ये बात चेतन मन तक ही रह जाती है। चेतन मन उन्हें आगे नहीं जाने देता, क्यों नहीं जाने देता? क्योंकि ये गलत बात का विरोध करता है। जब हम दुखी होते हुए भी खुश होने की बात करते हैं तो ये चेतन मन और चेतन मन तक उस बात को जाने ही नहीं देता है क्योंकि ये एक सुरक्षा गार्ड की तरह काम करता है। ये एक सुरक्षाकर्मी है। यदि इसको ये बात गलत लगती है तो ये अवचेतन मन तक नहीं जाने देता और जीस दिन हमने इस बात को अवचेतन मन तक पहुंचा दिया।
जैसे की मैं धनवान हूँ, मैं खुश हूँ उस दिन से जो तुम सोचोगे वो हो जायेगा। अब हमें इस अवचेतन मन तक इस बात को लेकर कैसे जानी है? मैं आपको इसका तरीका बताता हूँ क्योंकि हमारा चेतन मन हमेशा जागृत रहता है। लेकिन उचित नमन उस समय जागृत रहता है। दिन में सिर्फ तीन बार शाम को सोने से पहले और सुबह उठने से पहले और तीसरे ज्ञान के वक्त अब तुम शाम को सोने जाओ तो हमेशा अपने मन में सकारात्मक बातें सोचो।
मैं अमीर हूँ, मेरे घर में सुख शांति है, मेरे घर में सब कुछ सवस्थ चल रहा है, मैं एक सवस्थ हूँ तो भी उठो उस समय भी तुम ये करो, रोज़ 10 मिनट कर सकते हो। मैं तुम्हें कहता हूँ कि तुम एक महीने तक करके देखो, तुम्हारी जिंदगी बदल कर रख देगी। ये इतनी शक्तिशाली शब्द है। बहुत ही कम लोग इनकी ताकत को समझ पाए हैं। जिसने भी इसकी ताकत को जाना है वो इनका इस्तेमाल करके जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। कामयाबी के नए आयाम स्थापित किए हैं।
और तीसरा तुम ध्यान करते वक्त अपने अवचेतन मन तक इस बात को लेकर जाओ क्योंकि तुम्हारा चेतन मन तुम्हें रोक रहा है ये बात करने से लेकिन तुम अपने ध्यान की ताकत से इस बात को अवचेतन मन तक पहुंचा सकते हो और अवचेतन मन तक यह बात पहुंचने के बाद और चेतन मन की ताकत इतनी है कि उसे तुम्हारी जिंदगी में सच साबित कर देगी, लेकिन तुम्हें एकदम सच्चे मन से करना होगा और ऐसा भी नहीं है कि तुम्हें सिर्फ शाम को सोते वक्त सुबह उठने के बाद या दान में ही तुम्हें सकारात्मक रहना नहीं।
पूरे दिन तुम्हें चौबीसों घंटे सकारात्मक ही रहना है। जैसे की जब तुम शाम को सोने जाओ तो ये कहना की मैं धनवान मैं खुश हूँ। मेरे घर में सब सवस्थ हैं। जो भी उठते हो, उसमें भी यही कहना ध्यान में रहते हो तब भी यही कहना लेकिन अब सब दिन तो ये नहीं चलेगा। इसीलिए जीस समय तुम्हारा चेतन मन जाग्रत रहता है क्योंकि जिसमें ध्यान में नहीं रहोगे, उस समय तुम्हारा चेतन मन जागृत रहेगा तो चेतन मन के जागृत रहते हुए भी एक बात कह सकते हो।
मैं धनवान हो रहा हूँ। मुझे धन कमाने के लिए नए नए कार्य मिल रहे हैं। मैं सवस्थ हो रहा हूँ जैसे कि कार्य चल रहा है, इसके बारे में बताना इस बात को तुम्हारा चेतन मन स्वीकार कर लेगा। वो उस बात को नहीं करता है जैसे कि दुखी होते हुए भी हम सुखी बात करते हैं कि हम सुखी है, उस बात को चेतन मैनी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन इस बात को कर लेगा की मैं दवाई खा रहा हूँ और मैं सवस्थ हो रहा हूँ जैसे की आप बीमार हो और आप अपने मन को ये कहो।
बीमार नहीं हूँ तो चेतन मन नहीं मानेगा, लेकिन ये कहूं कि मैं सवस्थ हो रहा हूँ, मैं जो दो वही खा रहा हूँ उससे मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा। इस बात को चेतन मन स्वीकार कर लेगा और उसके बाद ये बात तुम्हारी अवचेतन मन तक पहुँच जाएगी और उसके बाद ही तुम्हारी जिंदगी में चमत्कार हो जाएगा। इन दो शब्दों को तुम सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख गए तो तुम्हारी जिंदगी चेंज हो जाएगी। जैसे मैंने तुम्हें बताया है तुम्हें हमेशा यही करना है और विश्वास रखना।
तुम खुश हो जाओगे, तुम्हारी जिंदगी में खुशियां लौट कर आ जाएगी। तुम्हारी दुकान का धंधा अच्छा चलना शुरू हो जाएगा। विश्वास के साथ कहना जैसे की तुमने जैसे कि तुम्हारी पत्नी के मन में यह विश्वास था कि मुझे दान नहीं देना है तो नहीं देना है। यही विश्वास, यही सकारात्मकता तुम्हारे मन में रखनी है। देखना धीरे धीरे तुम्हारी जिंदगी चेंज हो जाएगी। दोस्तों हमें भी अपनी जिंदगी में इसी तरीके से अपने अवचेतन मन तक इस बात को पहुंचाना है और जीस दिन हमारे अवचेतन मन तक यह बात पहुँच गई
कुछ दिन हमारी जिंदगी चेंज हो जाएगी करके देखना ना की इसमें कुछ पैसा लगता है, ना ही हमें ज्यादा समय लगता है। बहुत ही कम समय लगता है और बहुत ही जल्दी आपको इसका रिज़ल्ट भी मिलना शुरू हो जाएगा क्योंकि बहुत लोगों ने इन्हें अनुभव किया है। बहुत लोगों ने पाया है। इसीलिए इस पर इतनी बात होती है कि जो तुम सोचते हो वो होता है। बहुत बड़े बड़े संत महात्माओं ने यह बात कही है। ऋषि मुनियों ने ये बात कही है तो फिर ये बात झूठी कैसे हो सकती है? हम इसको नकार कैसे सकते हैं? और विश्वास के साथ ये बात करना जरूर आपकी जिंदगी चेंज हो पाएगी? जो आप सोचोगे वही होगा। उम्मीद है यह कहानी आपको पसंद आई होगी और दी हुई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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