जीवन खुशियों से भर जाएगा | jivan khusiyon se bhar jayega| hindi kahaniya | moral stories | Motivational Story

जीवन खुशियों से भर जाएगा | jivan khusiyon se bhar jayega| hindi kahaniya | moral stories | Motivational Story
स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - जीवन खुशियों से भर जाएगा | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, Motivational Story पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|

यह एक ऐसी ध्यान विधि जिसमें बिना कुछ करे, आप ध्यान में उतर जाएंगे और ज्ञान को प्राप्त कर लेंगे। किसी ने सवाल किया था कि ध्यान की कोई सरल विधि बताएं, जिससे हम सीधे ध्यान में उतर जाए।

क्या आपको ऐसा लगता है कि इस दुनिया में कोई भी कार्य है, बिना कुछ किये पूरा हो सकता है और क्या ध्यान इतना मुश्किल कार्य है कि आप उसे कर नहीं पाते? जरूर यह मुश्किल ही होगा। इसीलिए आप कोई आसान विधि ढूंढ़ते रहते हैं जिसमें आपको कुछ करना ही ना पड़े। सब स्वयं से हो जाए लेकिन ऐसा नहीं होता। कुछ तो आपको करना ही पड़ेगा।

बिना कुछ करे तो कुछ मिलेगा नहीं याद रहे जो जितना कठिन परिश्रम करता है उसे उतना ही अधिक मिलता है और जो परिश्रम नहीं करते उन्हें उतना ही कम मिलता है। तो हम यहाँ ध्यान की बात कर रहे हैं। ध्यान को हम कैसे आसान बना सकते हैं? वैसे ध्यान आसान ही है लेकिन ना जाने हम क्यों यह मान लेते हैं कि ध्यान बहुत बड़ा और मुश्किल कार्य है।

याद रहे मान लेना एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। जब आप कुछ मान लेते हैं तो सामने वाली चीज़ वैसी ही दिखाई देने लगती है और घटनाएं भी उसी अनुरूप से घटने लगती है। एक छोटी सी कहानी है। एक गांव में एक व्यक्ति बड़ा खुश रहता था। वह छोटी छोटी चीजों में भी खुशियां ढूंढ लेता था क्योंकि वह ये मानता था कि जो मिल रहा है।

उसे देने वाला अर्थात भगवान उस से बहुत प्रेम करता है। इसीलिए हमेशा हर परिस्थिति में सुखमय दुख में उसे कुछ मिले या ना मिले, वह खुश ही रहता था। उसका एक पड़ोसी था। पड़ोसी उससे ज्यादा धनवान था जबकि वह व्यक्ति बहुत गरीब था। पड़ोसी को उसकी यह खुशी बर्दाश्त नहीं होती थी। वह किसी भी तरह उसे उदास देखना चाहता था। वह चाहता था कि वह यह मान लें कि धन के सहारे ही खुशी मिलती है। 1 दिन वह अमीर आदमी उस गरीब आदमी के पास आया और उसने कहा, इस रास्ते से एक औरत रोज़ एक टोकरा लेकर जाती है। जब भी वह औरत मेरे सामने आ जाती है, उस दिन मेरा पूरा का पूरा दिन बर्बाद हो जाता है।

बड़ी मानुष है वह औरत यही बात उस अमीर आदमी ने उस गरीब आदमी को कई बार उसके घर आकर बताई। 1 दिन वह गरीब आदमी बड़ी खुशी खुशी में एक मार्ग पर जा रहा था। रास्ते में उसे वह टोकरी वाली औरत दिखाई दी। उसे तुरंत उस अमीर आदमी की बात याद आ गई की यह औरत मनुष है। तभी अचानक उसके पैर में कांटा चुभ गया। ऐसा नहीं है कि यह कांटा पहली बार उसके पैर में चुभा था, लेकिन पहले जब भी कांटा चुभता था वह ईश्वर को धन्यवाद कर आगे निकल जाता था। वह कहता था कि धन्यवाद आपने मुझे बचा लिया। कुछ बड़ा भी हो सकता था।

लेकिन आज उसने सोचा शायद वह अमीर आदमी सही कहता है और यह औरत मनुष्य ही है। वह औरत लगभग रोज़ उसके सामने आ ही जाती थी। पहले भी आती रही होगी लेकिन तब ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब वह ध्यान दे रहा था। उसके सामने आने के बाद वह उन क्षणों को याद रखता जिसमें उसे कुछ दुख मिला हो। इस तरह उन दुखों के क्षणों को वे इकट्ठा करता रहा और इसके लिए वे उस औरत को जिम्मेदार मानने लगा। धीरे धीरे उसकी खुशी छिन गई। अब उसके साथ कुछ भी अच्छा नहीं होता था। वह छोटी छोटी चीजों में भी दुख ढूंढ ही लेता था। वह परेशान हो गया और 1 दिन उसने सोचा कि इस औरत की हत्या कर देता हूँ। जब यह औरत ही नहीं रहे गी तब मेरे साथ कोई अनहोनी भी नहीं होगी।

इस विचार के साथ एक रात वह उसकी हत्या करने निकला। रात के अंधेरे में वह एक व्यक्ति से टकराया। यह व्यक्ति उस गरीब व्यक्ति का गुरु था। वे गुरु जानता था कि उसका शिष्य है एक टोकरी वाली औरत की वजह से दुखी हैं। गुरु ने उस व्यक्ति के हाथ में हथियार देखकर कहा कहो इस की हत्या करने जा रहे हो। गरीब व्यक्ति ने कहा, एक औरत ने मेरी सुखी जीवन में आग लगा दी है। जब भी वह मुझे दिख जाती हैं, मेरी साथ अनहोनी होने लगती है। मैं उससे बचकर निकलना चाहता हूँ, लेकिन वह जानबूझकर मेरे सामने आ जाती है। मैं उसी की हत्या करने जा रहा हूँ। गुरु ने कहा किसी की हत्या मत करो, मैं तुम्हें एक रास्ता बताता हूँ। यहाँ एक औरत रहती है। वह रोज़ टोकरी लेकर जाती है और वह औरत बहुत भाग्यशाली हैं।

जो भी उसके दर्शन कर लेता है, उसके जीवन में आने वाले दुख आधे हो जाते हैं तो तुम उसे देख लिया करो, तुम्हारे जीवन के दुख आधे हो जाएंगे। यह कहकर वह गुरु वहाँ से चला गया। उस गरीब को अपने गुरु की बात पर बहुत विश्वास था। अतः उसने मान लिया कि उस औरत के दिखाई देने के कारण ही उसके जीवन में आने वाले भयंकर दुखों से वह बच पाया और उसे कुछ ही दुख मिले।

अब वह फिर से खुश हैं क्योंकि वह रोज़ उस टोकरी वाली औरत को देखकर निकल जाता है और उसे यह विश्वास हो जाता है कि अब उसका अहित नहीं होगा। और कुछ होता भी है तो वह यह सोच लेता है कि शायद इससे बड़ा अहित उसका होने वाला था। हालांकि इस सब के बारे में उस टोकरी वाली औरत को कुछ भी नहीं पता कि किसी ने उसके कारण दुख पाया और उसी के कारण सुख भी पाया।

तो यहाँ पर हम बात कर रहे थे। मान लेने की ध्यान में मान लेना एक बड़ी भूमिका निभाता है। अगर आप यह मान लेते हैं कि ध्यान कठिन है और एक जनम में आप कभी बुद्धम् को प्राप्त नहीं कर सकते, इसके लिए जन्मों जन्मों भटकना पड़ता है। तो विश्वास कीजिए आप जन्मों जन्मों ही भटकेंगे क्योंकि आपका विश्वास कुछ ऐसा ही कहता है। आपने कुछ ऐसा ही मान रखा है।

एक बात और जो लोग मान कर रखते हैं कि ध्यान करने से व्यक्ति पागल हो जाता है ऐसा मानकर ध्यान करेंगे तो ऐसा ही होगा। ज़रा सोचें कि क्या नकारात्मक विचारों से सकारात्मक चीजें बनाई जा सकती है? सकारात्मकता चाहिए, तो सकारात्मक विचारों को उत्पन्न करना ही होगा।

अब बात आती है कि ध्यान कैसे करें? ध्यान बांध की बात है। शुरुआत में हम केवल ध्यान की कोशिश ही कर सकते हैं, लेकिन एक बात आपने ध्यान दी होगी आप पूरे दिन में बहुत सारा समय बेकार की कार्यों में व्यर्थ तो कर सकते हैं, लेकिन कोई अगर आपसे यह कह दें कि आप रोज़ केवल 5 मिनट के लिए आंखें बंद करके केवल अपनी सांसों पर ध्यान करे तब आप से यह नहीं होगा।

आप 1 दिन करेंगे, 2 दिन करेंगे, 3 दिन भी कर सकते हैं और किसी की बात सुनकर अगर आप अधिक मोटिवेट हो गए हैं तो कुछ लोग 15 दिन या महीना भर भी कर सकते हैं, लेकिन फिर यह करना बाहरी हो जाएगा और आप इसे करना छोड़ देंगे। केवल 5 मिनट दिन के निकाल लेना कोई मुश्किल बात तो नहीं है। इससे सरल और आसान कुछ हो सकता है क्या? शुरू में। ध्यान की कोशिश होगी, ध्यान नहीं लगेगा। आप व्यतीत होंगे। अलग अलग मार्ग ढूंढने की कोशिश करेंगे। कोई ऐसा रास्ता जिसपर ध्यान शीघ्रता से आ जाए। कुछ लोग धैर्य बनाकर रखेंगे, ध्यान की कोशिश को जारी रखेंगे और कुछ लोग इस मार्ग से हट जाएंगे जो मार्ग पर चलते रहेंगे, ध्यान की कोशिश करते रहेंगे, लेकिन व्यथित नहीं होना है।

उन में धीरे धीरे ध्यान अवतरित होगा। फिर धीरे से संपूर्ण ध्यान आएगा। उस ध्यान में आप चीजों को जानना शुरू करेंगे और ये ही जानना आपकी समझ में विस्तार करेगा। यही समझ आप में ज्ञान को अवतरित करेगी। भगवान बुद्ध अनापानसति योग को कराते थे। इसमें सांसों पर ध्यान दिया जाता है क्योंकि सांस एक ऐसी चीज़ है जो हमेशा आपके साथ रहेंगी। जब तक आपकी साथ आपका यह शरीर है तब तक ही ध्यान भी संभव है। बिना सांसों की बिना शरीर के ध्यान नहीं किया जा सकता। सांस रूपी यह एक ऐसा यंत्र है जो आपको मिला हुआ है जिसपर आप कभी भी, कहीं भी, किसी भी अवस्था में ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

बाकी कोई चीज़ ऐसी नहीं है जिसे हर जगह, हर समय अपने साथ आप लेकर चल सकते हो। और वह आपको इस भौतिक जगत से आपके आंतरिक जगह तक जोड़ती हो। आपको दिन में कितनी बार ध्यान आता है कि आप सांस भी ले रहे हैं? एक प्रयोग करके देखिए यह उनके लिए है जो सरल ध्यान ढूंढ़ते हैं। आप सब मोबाइल फ़ोन तो यूज़ करते ही हैं, इन्टरनेट भी मिला हुआ है, उंगलियां फ़ोन पर चलती रहती है, कुछ नहीं तो आप फ़ोन को ऑन कर कर ही देख लेते हैं।

कुछ मिल जाए मजेदार ढूंढ़ते रहते हैं। फ़ोन एक आदत सी बन गई है। तो आपको करना यह है कि आपको अपना फ़ोन साइड में रख देना है और अपने आप पर ध्यान केंद्रित करना है कि आप कितनी देर तक फ़ोन को बिना यूज़ करें रह सकते हैं। ध्यान देना और देखना कि कोई आपको भीतर से फोर्स करेगा कि फ़ोन को उठाकर देख लें। अब ये फोर्स करने वाला कौन है? क्या ये है? आप ही है या कोई और है जो आपको फोर्स कर रहा है? या यह एक आदत है जो होना चाहती है, सभी आदतें होना चाहती है? वह आपके द्वारा बाहर की ओर कार्य कराना चाहती है और अगर ये एक आदत है जो आप पर हावी हो रही है तो आंखें बंद करना और ध्यान देना की आप में यह आदत कहाँ से आई है और आपके भीतर कहा समाई हुई है। क्या आप इसे पहचान सकते हैं और कैसे?

ऐसी बहुत सी आदतें आप का निर्माण कर रही है बिना आपकी अनुमति लिए। ऐसे ही जीवन की छोटी छोटी बातों में आप ध्यान को केन्द्रित कर सकते हैं, उसमें अपने आप को ढूंढ सकते हैं। और अगर इस प्रयोग से आपको कुछ भी महसूस होता है या नहीं होता है या यह बात आपकी सर के ऊपर से निकल गई हों जिसकी ज्यादा संभावना है हमें कमेंट करके जरूर बताएं

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