खुद को कम समझना भूल जाओगे | khud ko kam samjhna bhul jaoge | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
खुद को कम समझना भूल जाओगे | khud ko kam samjhna bhul jaoge | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - खुद को कम समझना भूल जाओगे | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|
मनुष्य जीवन बड़ी जटिलताओं से भरा हुआ है। समझ नहीं आता हम क्यों है और क्या कर रही है? पहले तो यह सवाल भी हर किसी के ख्याल में नहीं आता कि हम क्यों है और क्या कर रही है? कोई एक व्यक्ति जो थोड़ा बहुत जागना सीख लेता है, वही सोच पाता है कि मैं कौन हूँ और क्या कर रहा हूँ? नहीं तो हम सब अपनी जिंदगी में केवल अफसरों को खोजते हैं। अवसर जिसमें हम कामयाब हो जाये जो हमें हमारी मनचाही चीज़ दे दे। ऐसे अवसर खोजने के लिए हम लगातार प्रयत्न करते रहते हैं और बहुत से लोगों को आपने कहते सुना होगा क्या करे सही अवसर हाथ नहीं लगा नहीं तो कामयाब हो जाते एक युवक अपनी जिंदगी से परेशान होकर जंगल में इधर उधर भटक रहा था।
वह अपने जीवन में अभी तक कुछ नहीं कर पाया था। उसे कोई अवसर नहीं मिला था। वह जो भी कुछ कर नहीं जाता, सब बिगड़ जाता। उसके माता पिता ने भी उसे सुनाना शुरू कर दिया था। वह एक ऐसी अवसर की तलाश में था जो उसकी जिंदगी को बदल दें, पर कहीं से भी उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी। ऐसा हमारे साथ भी कई बार होता है।
हम सोचते हैं कि हम यह करेंगे तो हमें हमारा मनचाहा फल मिलेगा, पर हो जाता उसका उल्टा ही है और हम निराश हो जाते हैं। अनेकों असफलताओं के बाद भी हम कामयाब नहीं हो पाते। हमें वैसी अवसर नहीं मिलते जैसी दूसरों को मिलते दिखाई देते हैं। घर परिवार के झगड़े, उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने का दबाव, किसी की आशाओं को पूरा करने का दबाव। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं और ऐसे झगड़े घर में और बाहर जो भी वजह के ही होते है हम पर हमारे भीतर तक हमें नीचे गिरा देते हैं। हमें सब बेकार लगने लगता है। जीवन बेकार लगता है, सब छोड़कर भाग जाने का मन करता है।
इसी तरह वह युवक भी भाग रहा था। अपने कंधों पर पड़े सभी बोझ को उतारकर वह जंगल के रास्ते ही भाग रहा था। उसे लग रहा था की यही सबसे अच्छा अवसर है अपनी सभी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाने का। कब तक मैं सबकी आशाओं को पूरा करता रहा हूँ। कब तक मैं अपनी जिम्मेदारियों के नीचे दबा रहा हूँ? कब तक मैं लोगों के लिए अपना जीवन बर्बाद करता रहूँ?
मैं बस जीना चाहता हूँ, अपने लिए जीना चाहता हूँ, किसी और के लिए नहीं। जंगल में भटकते भटकते रात हो गई, जंगली जानवरों का डर सता रहा था। उसने शेर की दहाड़ने की आवाज सुनी और उसे अपने घर वाले जब याद आ गए उसे अपने माता पिता याद आ गयी। उसने सोचा यह मैं कहाँ आ फंसा आज तो मैं गया काम से घर पर ही सही था।
कम से कम सुरक्षित तो था वह डरते डरते थोड़ा आगे बढ़ा उसी का आश्रम दिखाई दिया। वह आश्रम में प्रवेश कर गया। रातभर वे आश्रम के कोने में पड़ा सोया रहा। सुबह को उस आश्रम की गुरु ने उस युवक को आश्रम के एक कोने में सोते हुए देखा तो उसे उठाया और कहा। कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो? युवक ने कहा मैं भटक गया हूँ, क्या आप मुझे सही राह दिखा सकते हैं?
गुरु मुस्कुराए और गुरु ने कहा, हाँ, क्यों नहीं, पर पहले तुम मुझे अपनी समस्या तो बताओ? युवक ने कहा, जीवन में सब को अवसर मिलते हैं, सब उन अवसरों का फायदा उठाते हैं और कामयाब हो जाते है। पर मुझे आज तक कोई अवसर नहीं मिला, जिसका कारण मैं अपने जीवन में कामयाब नहीं हो सका और अपने परिवार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। मैं केवल
अपने जीवन में एक अवसर चाहता हूँ। एक ऐसा अवसर जिससे मैं अपनी सारे सपनों को पूरा कर सकूँ, अपने परिवार की उम्मीदों पर खरा उतर सकूँ, सबको खुश रख सकूँ। गुरु ने कहा हाँ, हाँ, क्यों नहीं? तुम्हें पूरा अवसर मिलेगा। जो तुम चाहो गे कर पाओगे पर उससे पहले तुम्हें एक कार्य करना होगा। क्या तुम वह कार्य करने के लिए तैयार हो? युवक ने कहा हाँ गुरुदेव जो आप कही मैं करने के लिए तैयार हूँ। गुरु ने अपनी झोली से कीमती पत्थर निकाला और उस युवक के हाथ में रखते हुए कहा यह पत्थर वहाँ उस पेड़ पर बैठे बंदर को दे दो और उससे कहो की वह पत्थर बाजार में बेच आये और अधिक से अधिक कीमत में बेचे। युवक ने कहा, पर गुरुदेव एक बंदर कीमती पत्थर का मूल्य नहीं जानता तो वह इसे कैसे बेचेगा और वह तो खरीदना बेचना भी नहीं जानता।
तो वह यह कैसे कर सकेगा? गुरु ने कहा, कोई बात नहीं, तुम उसे सीखा दो, वे सीख जाएगा। अब अगर अपने जीवन में एक बेहतरीन अवसर चाहते हो तो यह करना ही होगा। युवक वह पत्थर लेकर पेड़ पर बैठे इस बंदर के पास गया और उससे कहा।
बंदर जी यह पत्थर ले लीजिए और इसे बाजार में बेच गार अधिक से अधिक कीमत ले। आइये पर बंदरगाह उस युवक की तरफ कोई ध्यान नहीं था। फिर युवक ने पत्थर को पेड़ की डाल पर रख दिया। बन्दर ने वह पत्थर उठाया और नीचे फेंक दिया। इसी तरह करते करते 3 दिन बीत गए पर वह युवक उस बंदर को कुछ समझा नहीं पाया। वह गुरु के पास गया और उसने कहा
गुरुदेव बंदर नहीं मान रहा और बंदर कैसे कोई चीज़ बेच सकता है? गुरु ने कहा तो फिर कौन बेच सकता है?
युवक ने कहा मैं भेज सकता हूँ, कोई भी मनुष्य बेच सकता है पर जानवर कैसे बेचेगा गुरु ने कहा चलो कोई बात नहीं वहाँ सामने जो बकरी दिख रही है जाओ और उसे कविता सुनाओ और उसे वह कविता याद कराओ, मैं उस बकरी से वह कविता सुनना चाहता हूँ। युवक ने मन में कहा गुरुदेव पता नहीं कैसे कैसी बहकी बह की बातें कर रही है
भला बकरी कविता कैसे याद कर सकती है और सुना सकती है? उसने गुरु से कहा, पर गुरुदेव यह नहीं हो सकेगा। बकरी को कविता का ज्ञान ही नहीं है, उसमें इतनी समझ ही नहीं है कि वह कविता को समझ सके। गुरु ने कहा तो कविता को कौन समझ सकता है? युवक ने कहा मैं समझ सकता हूँ कोई भी मनुष्य समझ सकता है पर जानवर नहीं। गुरु ने कहा तुम दोनों में से कोई कार्य नहीं कर पाए। युवक ने कहा, पर गुरुदेव मुझे वह अवसर चाहिए कोई ऐसा कार्य दीजिए जो किया जा सकता हो। गुरु उस युवक को अपने साथ एक जगह पर ले गए जहाँ पर एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी तक।
एक लकड़ी का पुल बना हुआ था, वो है पुल बहुत ही खराब हालत में था उस पुल पर कोई नहीं जाता था। बहुत पुराना हो चुका था। गुरु ने युवक से कहा तुम्हें मेरे साथ इस पुल पर चलना होगा। युवक ने कहा पर गुरुदेव ये पुल तो पुराना है, गिर भी सकता है। गुरु ने कहा अवसर चाहिए तो चलना तो होगा ही। गुरु और वह युवक। उस पुल की उपर से चलने लगी। उस पुल से अलग अलग तरह की आवाजें आने लगीं। वह चरमराने लगा। युवक घबरा गया। गुरु उस पुल के बीच में जाकर रुक गए और वहीं बैठ गए। युवक से कहा चलो कुछ लकड़ियां निकालो, खाना बनाते हैं, भूख लगी है। युवक ने कहा आप कैसी बातें कर रही है? इस लकड़ी के पुल पर भला खाना कैसे बन सकता है? इससे तो पुल जल जाएगा। गुरु ने कहा।
तो ठीक है हम यहीं पर इस पुल पर एक घर बनाएंगे और इसी में रहेंगे। युवक ने कहा इस कमजोर से पुल पर घर कैसे बनेगा घर और यह पुल दोनों टूट जाएंगे। गुरु ने कहा तो ठीक है, हम यहाँ पर इस पुल पर बहुत सारा धन इकट्ठा करेंगे। इस पुल को धन से भर देंगे। युवक ने कहा, लेकिन गुरुदेव जब हम जिंदा ही नहीं रहेंगे तो इतनी धन का क्या करेंगे? ये है तो हमारी वजह से ही गिरा जा रहा है। इस पर कुछ और नहीं रखा जा सकता। गुरु ने कहा, तो तुम क्या चाहते हो? हमें क्या करना चाहिए? युवक ने कहा, पुल के जीस तरफ से हम आये थे। वह ज्यादा कमजोर है इसलिए हमें पुल के दूसरी ओर निकल जाना चाहिए। गुरु ने कहा ठीक है जैसा तुम कहो। गुरु और वह युवक पुल के दूसरी ओर निकल आए। युवक की सांसें फूली हुई थी।
मैं घबराया हुआ था। उसने गुरु से कहा, गुरुदेव मुझे कोई एक अवसर नहीं चाहिए, मुझे माफ़ करें पर अब मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा जो आप कहेंगे। गुरु ज़ोर से हंसे और गुरु ने कहा, पर वहीं का अवसर तो तुम्हें मिल चुका है। युवक ने कहा कहा कब मिला, मुझे तो कुछ पता ही नहीं गुरु ने कहा, तुम्हारा मनुष्य होना ही वह अवसर है जो तुम्हें कुछ भी करने की क्षमता प्रदान करता है, समझने की क्षमता देता है, समझाने की क्षमता देता है। यह मनुष्य शरीर उन जानवरों की अपेक्षा अवसरों से भरा है जिन्हें तुम ना बेचना सीखा सके और ना ही कविता सीखा सके जो कार्य वहन नहीं कर सकते।
वह तुम कर सकते हो। मनुष्य रूप में जनम लेना सबसे बड़ा अवसर है। इस अवसर को ज्यादातर लोग गवां देते हैं। देखो इस पुल को ज़िंदगी एक पुल की तरह है। ज्यादातर लोग पुल के उस किनारे पर जनम लेते हैं और बीच में आते आते इस पुल पर घर बना लेते हैं, रिश्ते बना लेते हैं, धन इकट्ठा कर लेते हैं, शत्रु बना लेते हैं, मित्र बनाते हैं।
इच्छाओं का एक बड़ा पेड़ लगाते हैं, जो कभी पूरी नहीं होती, हमेशा अधूरी रह जाती है और जब की ये पुल हमेशा नहीं रहता और 1 दिन टूट जाता है और इस पर घर बनाने वाले नीचे खाई में गिर जाते हैं। जबकि यह एक अवसर था पुल के उस किनारे से इस किनारे तक आने का इस मार्ग को पूरा करने का और वह जानने का वह समझने का जो तुम जिंदगी भर नहीं समझ पाए। पुल के इस तरफ क्या है?
तुम कभी जान ही नहीं पाते क्योंकि तुम उस अवसर का उपयोग नहीं कर पाते जो मनुष्य रूप में जन्म लेकर तुम्हें मिला है, कोई नहीं कर पाता। वह युवक गुरु के चरणों में गिर गया और कहा, गुरुदेव आप ने मेरी आंखें खोल दीं, मैं तो अपने आप को धरती पर बोझ समझ रहा था, पर अपनी मुझे वह अवसर दिखाया जो सबके पास है पर कोई उसे नहीं जानता। यह तो एक राज़ है और इस राज़ को मुझे समझाने के लिए आपका धन्यवाद। अब मैं अपने जीवन का भरपूर उपयोग करूँगा और पुल के उस किनारे से इस किनारे तंग जरूर आऊंगा। हम लोग भी अपनी जिंदगी में इतनी उलझी हुए रहते हैं की कभी अपने बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिलता। हम हमेशा दूसरों के बारे में ही सोचते रहते हैं।
दूसरों की फिक्र करना उनकी बारे में सोचना गलत नहीं है। पर अपने आप को भूल जाना जरूर गलत है। जीवन तू जानवर और मनुष्य दोनों ही जीते हैं और अगर कोई जानवर बोल सकता तो वह कहता कि मेरे और इंसानों के जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। जैसे हम मर रहे हैं, वैसे ही इंसान भी मर रहे हैं। हमारे पास ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता नहीं है तो हम नहीं कर सकते। पर मनुष्य के पास क्षमता आई है, लेकिन वह क्या कर रहा है?
वह भी तो हमारी तरह ही मर रहा है जबकि मनुष्य के पास चिंता लोभ लालच क्रोध और ना जाने ऐसी क्या क्या चीजें भरी पड़ी है पर हमारे पास तो नहीं है तो हम जानवर ज्यादा सुखी है अगर हमारे जीवन में कोई दुख है तो वह भी मनुष्य की वजह से ही है इसलिए अपने हाथ में आए इस अवसर को पहचानो इसे बस यूं ही मत लुटा देना
मनुष्य जीवन बड़ी जटिलताओं से भरा हुआ है। समझ नहीं आता हम क्यों है और क्या कर रही है? पहले तो यह सवाल भी हर किसी के ख्याल में नहीं आता कि हम क्यों है और क्या कर रही है? कोई एक व्यक्ति जो थोड़ा बहुत जागना सीख लेता है, वही सोच पाता है कि मैं कौन हूँ और क्या कर रहा हूँ? नहीं तो हम सब अपनी जिंदगी में केवल अफसरों को खोजते हैं। अवसर जिसमें हम कामयाब हो जाये जो हमें हमारी मनचाही चीज़ दे दे। ऐसे अवसर खोजने के लिए हम लगातार प्रयत्न करते रहते हैं और बहुत से लोगों को आपने कहते सुना होगा क्या करे सही अवसर हाथ नहीं लगा नहीं तो कामयाब हो जाते एक युवक अपनी जिंदगी से परेशान होकर जंगल में इधर उधर भटक रहा था।
वह अपने जीवन में अभी तक कुछ नहीं कर पाया था। उसे कोई अवसर नहीं मिला था। वह जो भी कुछ कर नहीं जाता, सब बिगड़ जाता। उसके माता पिता ने भी उसे सुनाना शुरू कर दिया था। वह एक ऐसी अवसर की तलाश में था जो उसकी जिंदगी को बदल दें, पर कहीं से भी उसे कोई मदद नहीं मिल रही थी। ऐसा हमारे साथ भी कई बार होता है।
हम सोचते हैं कि हम यह करेंगे तो हमें हमारा मनचाहा फल मिलेगा, पर हो जाता उसका उल्टा ही है और हम निराश हो जाते हैं। अनेकों असफलताओं के बाद भी हम कामयाब नहीं हो पाते। हमें वैसी अवसर नहीं मिलते जैसी दूसरों को मिलते दिखाई देते हैं। घर परिवार के झगड़े, उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने का दबाव, किसी की आशाओं को पूरा करने का दबाव। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं और ऐसे झगड़े घर में और बाहर जो भी वजह के ही होते है हम पर हमारे भीतर तक हमें नीचे गिरा देते हैं। हमें सब बेकार लगने लगता है। जीवन बेकार लगता है, सब छोड़कर भाग जाने का मन करता है।
इसी तरह वह युवक भी भाग रहा था। अपने कंधों पर पड़े सभी बोझ को उतारकर वह जंगल के रास्ते ही भाग रहा था। उसे लग रहा था की यही सबसे अच्छा अवसर है अपनी सभी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाने का। कब तक मैं सबकी आशाओं को पूरा करता रहा हूँ। कब तक मैं अपनी जिम्मेदारियों के नीचे दबा रहा हूँ? कब तक मैं लोगों के लिए अपना जीवन बर्बाद करता रहूँ?
मैं बस जीना चाहता हूँ, अपने लिए जीना चाहता हूँ, किसी और के लिए नहीं। जंगल में भटकते भटकते रात हो गई, जंगली जानवरों का डर सता रहा था। उसने शेर की दहाड़ने की आवाज सुनी और उसे अपने घर वाले जब याद आ गए उसे अपने माता पिता याद आ गयी। उसने सोचा यह मैं कहाँ आ फंसा आज तो मैं गया काम से घर पर ही सही था।
कम से कम सुरक्षित तो था वह डरते डरते थोड़ा आगे बढ़ा उसी का आश्रम दिखाई दिया। वह आश्रम में प्रवेश कर गया। रातभर वे आश्रम के कोने में पड़ा सोया रहा। सुबह को उस आश्रम की गुरु ने उस युवक को आश्रम के एक कोने में सोते हुए देखा तो उसे उठाया और कहा। कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो? युवक ने कहा मैं भटक गया हूँ, क्या आप मुझे सही राह दिखा सकते हैं?
गुरु मुस्कुराए और गुरु ने कहा, हाँ, क्यों नहीं, पर पहले तुम मुझे अपनी समस्या तो बताओ? युवक ने कहा, जीवन में सब को अवसर मिलते हैं, सब उन अवसरों का फायदा उठाते हैं और कामयाब हो जाते है। पर मुझे आज तक कोई अवसर नहीं मिला, जिसका कारण मैं अपने जीवन में कामयाब नहीं हो सका और अपने परिवार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। मैं केवल
अपने जीवन में एक अवसर चाहता हूँ। एक ऐसा अवसर जिससे मैं अपनी सारे सपनों को पूरा कर सकूँ, अपने परिवार की उम्मीदों पर खरा उतर सकूँ, सबको खुश रख सकूँ। गुरु ने कहा हाँ, हाँ, क्यों नहीं? तुम्हें पूरा अवसर मिलेगा। जो तुम चाहो गे कर पाओगे पर उससे पहले तुम्हें एक कार्य करना होगा। क्या तुम वह कार्य करने के लिए तैयार हो? युवक ने कहा हाँ गुरुदेव जो आप कही मैं करने के लिए तैयार हूँ। गुरु ने अपनी झोली से कीमती पत्थर निकाला और उस युवक के हाथ में रखते हुए कहा यह पत्थर वहाँ उस पेड़ पर बैठे बंदर को दे दो और उससे कहो की वह पत्थर बाजार में बेच आये और अधिक से अधिक कीमत में बेचे। युवक ने कहा, पर गुरुदेव एक बंदर कीमती पत्थर का मूल्य नहीं जानता तो वह इसे कैसे बेचेगा और वह तो खरीदना बेचना भी नहीं जानता।
तो वह यह कैसे कर सकेगा? गुरु ने कहा, कोई बात नहीं, तुम उसे सीखा दो, वे सीख जाएगा। अब अगर अपने जीवन में एक बेहतरीन अवसर चाहते हो तो यह करना ही होगा। युवक वह पत्थर लेकर पेड़ पर बैठे इस बंदर के पास गया और उससे कहा।
बंदर जी यह पत्थर ले लीजिए और इसे बाजार में बेच गार अधिक से अधिक कीमत ले। आइये पर बंदरगाह उस युवक की तरफ कोई ध्यान नहीं था। फिर युवक ने पत्थर को पेड़ की डाल पर रख दिया। बन्दर ने वह पत्थर उठाया और नीचे फेंक दिया। इसी तरह करते करते 3 दिन बीत गए पर वह युवक उस बंदर को कुछ समझा नहीं पाया। वह गुरु के पास गया और उसने कहा
गुरुदेव बंदर नहीं मान रहा और बंदर कैसे कोई चीज़ बेच सकता है? गुरु ने कहा तो फिर कौन बेच सकता है?
युवक ने कहा मैं भेज सकता हूँ, कोई भी मनुष्य बेच सकता है पर जानवर कैसे बेचेगा गुरु ने कहा चलो कोई बात नहीं वहाँ सामने जो बकरी दिख रही है जाओ और उसे कविता सुनाओ और उसे वह कविता याद कराओ, मैं उस बकरी से वह कविता सुनना चाहता हूँ। युवक ने मन में कहा गुरुदेव पता नहीं कैसे कैसी बहकी बह की बातें कर रही है
भला बकरी कविता कैसे याद कर सकती है और सुना सकती है? उसने गुरु से कहा, पर गुरुदेव यह नहीं हो सकेगा। बकरी को कविता का ज्ञान ही नहीं है, उसमें इतनी समझ ही नहीं है कि वह कविता को समझ सके। गुरु ने कहा तो कविता को कौन समझ सकता है? युवक ने कहा मैं समझ सकता हूँ कोई भी मनुष्य समझ सकता है पर जानवर नहीं। गुरु ने कहा तुम दोनों में से कोई कार्य नहीं कर पाए। युवक ने कहा, पर गुरुदेव मुझे वह अवसर चाहिए कोई ऐसा कार्य दीजिए जो किया जा सकता हो। गुरु उस युवक को अपने साथ एक जगह पर ले गए जहाँ पर एक पहाड़ी से दूसरी पहाड़ी तक।
एक लकड़ी का पुल बना हुआ था, वो है पुल बहुत ही खराब हालत में था उस पुल पर कोई नहीं जाता था। बहुत पुराना हो चुका था। गुरु ने युवक से कहा तुम्हें मेरे साथ इस पुल पर चलना होगा। युवक ने कहा पर गुरुदेव ये पुल तो पुराना है, गिर भी सकता है। गुरु ने कहा अवसर चाहिए तो चलना तो होगा ही। गुरु और वह युवक। उस पुल की उपर से चलने लगी। उस पुल से अलग अलग तरह की आवाजें आने लगीं। वह चरमराने लगा। युवक घबरा गया। गुरु उस पुल के बीच में जाकर रुक गए और वहीं बैठ गए। युवक से कहा चलो कुछ लकड़ियां निकालो, खाना बनाते हैं, भूख लगी है। युवक ने कहा आप कैसी बातें कर रही है? इस लकड़ी के पुल पर भला खाना कैसे बन सकता है? इससे तो पुल जल जाएगा। गुरु ने कहा।
तो ठीक है हम यहीं पर इस पुल पर एक घर बनाएंगे और इसी में रहेंगे। युवक ने कहा इस कमजोर से पुल पर घर कैसे बनेगा घर और यह पुल दोनों टूट जाएंगे। गुरु ने कहा तो ठीक है, हम यहाँ पर इस पुल पर बहुत सारा धन इकट्ठा करेंगे। इस पुल को धन से भर देंगे। युवक ने कहा, लेकिन गुरुदेव जब हम जिंदा ही नहीं रहेंगे तो इतनी धन का क्या करेंगे? ये है तो हमारी वजह से ही गिरा जा रहा है। इस पर कुछ और नहीं रखा जा सकता। गुरु ने कहा, तो तुम क्या चाहते हो? हमें क्या करना चाहिए? युवक ने कहा, पुल के जीस तरफ से हम आये थे। वह ज्यादा कमजोर है इसलिए हमें पुल के दूसरी ओर निकल जाना चाहिए। गुरु ने कहा ठीक है जैसा तुम कहो। गुरु और वह युवक पुल के दूसरी ओर निकल आए। युवक की सांसें फूली हुई थी।
मैं घबराया हुआ था। उसने गुरु से कहा, गुरुदेव मुझे कोई एक अवसर नहीं चाहिए, मुझे माफ़ करें पर अब मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा जो आप कहेंगे। गुरु ज़ोर से हंसे और गुरु ने कहा, पर वहीं का अवसर तो तुम्हें मिल चुका है। युवक ने कहा कहा कब मिला, मुझे तो कुछ पता ही नहीं गुरु ने कहा, तुम्हारा मनुष्य होना ही वह अवसर है जो तुम्हें कुछ भी करने की क्षमता प्रदान करता है, समझने की क्षमता देता है, समझाने की क्षमता देता है। यह मनुष्य शरीर उन जानवरों की अपेक्षा अवसरों से भरा है जिन्हें तुम ना बेचना सीखा सके और ना ही कविता सीखा सके जो कार्य वहन नहीं कर सकते।
वह तुम कर सकते हो। मनुष्य रूप में जनम लेना सबसे बड़ा अवसर है। इस अवसर को ज्यादातर लोग गवां देते हैं। देखो इस पुल को ज़िंदगी एक पुल की तरह है। ज्यादातर लोग पुल के उस किनारे पर जनम लेते हैं और बीच में आते आते इस पुल पर घर बना लेते हैं, रिश्ते बना लेते हैं, धन इकट्ठा कर लेते हैं, शत्रु बना लेते हैं, मित्र बनाते हैं।
इच्छाओं का एक बड़ा पेड़ लगाते हैं, जो कभी पूरी नहीं होती, हमेशा अधूरी रह जाती है और जब की ये पुल हमेशा नहीं रहता और 1 दिन टूट जाता है और इस पर घर बनाने वाले नीचे खाई में गिर जाते हैं। जबकि यह एक अवसर था पुल के उस किनारे से इस किनारे तक आने का इस मार्ग को पूरा करने का और वह जानने का वह समझने का जो तुम जिंदगी भर नहीं समझ पाए। पुल के इस तरफ क्या है?
तुम कभी जान ही नहीं पाते क्योंकि तुम उस अवसर का उपयोग नहीं कर पाते जो मनुष्य रूप में जन्म लेकर तुम्हें मिला है, कोई नहीं कर पाता। वह युवक गुरु के चरणों में गिर गया और कहा, गुरुदेव आप ने मेरी आंखें खोल दीं, मैं तो अपने आप को धरती पर बोझ समझ रहा था, पर अपनी मुझे वह अवसर दिखाया जो सबके पास है पर कोई उसे नहीं जानता। यह तो एक राज़ है और इस राज़ को मुझे समझाने के लिए आपका धन्यवाद। अब मैं अपने जीवन का भरपूर उपयोग करूँगा और पुल के उस किनारे से इस किनारे तंग जरूर आऊंगा। हम लोग भी अपनी जिंदगी में इतनी उलझी हुए रहते हैं की कभी अपने बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिलता। हम हमेशा दूसरों के बारे में ही सोचते रहते हैं।
दूसरों की फिक्र करना उनकी बारे में सोचना गलत नहीं है। पर अपने आप को भूल जाना जरूर गलत है। जीवन तू जानवर और मनुष्य दोनों ही जीते हैं और अगर कोई जानवर बोल सकता तो वह कहता कि मेरे और इंसानों के जीवन में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। जैसे हम मर रहे हैं, वैसे ही इंसान भी मर रहे हैं। हमारे पास ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता नहीं है तो हम नहीं कर सकते। पर मनुष्य के पास क्षमता आई है, लेकिन वह क्या कर रहा है?
वह भी तो हमारी तरह ही मर रहा है जबकि मनुष्य के पास चिंता लोभ लालच क्रोध और ना जाने ऐसी क्या क्या चीजें भरी पड़ी है पर हमारे पास तो नहीं है तो हम जानवर ज्यादा सुखी है अगर हमारे जीवन में कोई दुख है तो वह भी मनुष्य की वजह से ही है इसलिए अपने हाथ में आए इस अवसर को पहचानो इसे बस यूं ही मत लुटा देना

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