समस्या का स्वभाव है हल होना | samsya ka swabhav hai hal hona| hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales

समस्या का स्वभाव है हल होना | samsya ka swabhav hai hal hona| hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales

दोस्तो आज की इस कहानी में आप सभी का स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - समस्या का स्वभाव है हल होना | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|

हिमालय के योगी से मिलने के बाद मात्र 13 दिन में स्टेशन मास्टर की पूरी जिंदगी बदल गई। ये कहानी स्वामी रामा की किताब लिविंग विद द हिमालयन मास्टर्स के चैपटर दो तब मास्टर डीजेएस में मिलती है। स्वामी रामा ने हिमालय में कठिन तपस्या करते हुए कई साल बिताए। इस बीच में कई संतों और योगियों से मिले और कुछ ऐसी घटना हुई जिन्होंने स्वामी रामा को आश्चर्य से भर दिया। एक ऐसी ही घटना हुई


जब स्वामी रामा अपने गुरु स्वामी माधवानंद आ भारती के साथ एक स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। उसी समय वहाँ का स्टेशन मास्टर आया और गुरु को प्रणाम करके कहा महाराज मैंने 2 दिन पहले सपने में देखा की एक संत मिलेंगे और मुझे मंत्र देंगे, जिससे मेरा जीवन बदल जाएगा। मैं 2 दिन से सो नहीं पा रहा महाराज मन बहुत बेचैन है, मेरी मदद कीजिये, मुझे ये मंत्र दीजिये जिससे मेरा जीवन सुधर जाए। कहा


आप घर परिवार वाले सरकारी नौकरी वाले है, क्यों इन सब चीजों में उलझना चाहते हैं? स्टेशन मास्टर समझदार था वो योगी का इशारा समझ गया। स्टेशन मास्टर ने कहा महाराज मैं कई दिनों से बेचैन हो रहा हूँ। ये जीवन बड़ा नीरज लगता है। मैं बार बार सोचता हूँ कि मेरा जन्म क्यों हुआ, मैं खुश क्यों नहीं हूँ? आप एक बार भूलकर तो देखिये मैं आपके दिए गए मंत्र का हर समय हर स्थिति में पालन करूँगा। स्टेशन मास्टर की बात सुनकर


मेरे गुरु ने छोड़ा सोचा और स्टेशन मास्टर से कहा ठीक है जीवन का एक मूल मंत्र है। ये हैं तो मुश्किल लेकिन अगर तुम्हारे अंदर इच्छा है तो ये जीवन में वापस रंग भर देगा। नई खुशी और शक्ति प्रकट होगी और तुम इस मंत्र से ही जीवन के सत्य को भी जान जाओगे। मंत्र है कि आज से अगले तीन महीने तक तुम हर समय सत्य बोलोगे, कुछ भी हो जाये तुम्हें सत्य ही बोलना है। ये बहुत कठिन है लेकिन अगर तुम पूरी निष्ठा से


किसी जीवन मंत्र का पालन करोगे तो तुम्हारा जीवन बदल जाएगा। इतना कहकर गुरु और स्वामी वहाँ से चले गए। स्टेशन मास्टर ने उसी क्षण सत्य बोलना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने रिश्वत में हिस्सा लेना बंद कर दिया। स्टेशन मास्टर की आदत थी की वो बहुत चाय पीते थे, लेकिन 2 दिन के अंदर उनकी चाय की इच्छा भी जाती रही। स्टेशन मास्टर को चैन की गहरी नींद आने लगी। संयोग से उसी हफ्ते रेलवे स्टेशन के कर्मचारियों की जांच करने वाला


फिर निरीक्षक पहुंचा। निरीक्षक को शिकायत मिली थी रेलवे स्टेशन के कई कर्मचारी घूस लेते है। जब निरीक्षण में स्टेशन मास्टर से पूछ्ताछ की तो स्टेशन मास्टर ने सच बता दिया की अभी तक हम जो भी रिश्वत लेते हैं वो आपस में बांट लेते है। निरीक्षक ने तुरंत रिपोर्ट बनाई और स्टेशन मास्टर समेत रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। स्टेशन मास्टर के सच बोलने की बेवकूफ़ी ने सभी कर्मचारियों को मुसीबत में डाल दिया।


तो कोर्ट में सारे कर्मचारियों ने स्टेशन मास्टर के खिलाफ़ झूठा बयान दिया की रिश्वत केवल स्टेशन मास्टर लेता है और हमें बदनाम करने के लिए झूठ बोलकर फंसाया है। स्टेशन मास्टर को 15 साल की सजा पक्की थी। इधर पत्नी और बच्चों ने भी साथ छोड़ दिया। स्टेशन मास्टर ने खुद से कहा अभी 13 दिन हुए हैं और सच बोलने के कारण नौकरी और परिवार चला गया। तीन महीने में ना जाने क्या होगा? ये शब्द स्टेशन मास्टर के मुँह से निकले और इधर स्वामी रामा के गुरु ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे।


स्वामी रामा से बोले जानते हो क्या हुआ, जिससे स्टेशन मास्टर को मैंने सत्य बोलने का मंत्र दिया था। आज वो जेल में है। उसका परिवार भी छोड़ गया। ये सुनकर स्वामी रामा ने पूछा तो फिर आप हस क्यों रहे है? स्वामी माधवानंद भारती ने बताया कि मैं उस स्टेशन मास्टर पर नहीं बल्कि दुनिया की मूर्खता पर हंस रहा हो। जब तक इंसान झूठ बोलता है, बेईमानी करता है, तब तक दुनिया इज्जत करती है। देखो ये सरकारी नौकरी वाला है। वहीं दुनिया सत्य पर चलने वाले वीर का तिरस्कार करती है।


तो फिर यही दुनिया कहती है की अब लोगों में सच्चाई कहाँ रही? इसलिए मैं हंस रहा हूँ।


जल्दी ही स्टेशन मास्टर को अदालत में पेश किया गया। जज ने पूछा तुम्हारा वकील कहा है? स्टेशन मास्टर ने कहा अब मुझे वकील की जरूरत नहीं है तो जज ने फिर कहा तुम सरकारी वकील की मदद ले लो, शायद तुम्हारी सजा काम हो जाये। पर स्टेशन मास्टर ने कहा मुझे वकील की आवश्यकता नहीं है। आप चाहे जितनी सजा हो, पर सच यही है की जो रिश्वत ली जाती थी, उसमें मैं एक हिस्सा लेता था। लेकिन 13 दिन पहले मेरी मुलाकात एक सन् से हुई। उन्होंने मुझसे कहा की कभी झूट मत बोल, ना


हर हाल में सत्य ही कहना। उस दिन से अब तक मैंने परिवार, दोस्त और बहुत कुछ खो दिया और अब मैं अदालत में खड़ा हूँ। यह सुनकर जज ने ब्रेक घोषित कर दिया और चुपचाप स्टेशन मास्टर को अपने कमरे में बुलाकर पूछा, कौन है वसंत? जिनकी बातों के प्रभाव में तुम सत्य बोलने पर अड़ी हो? स्टेशन मास्टर ने संत के बारे में बताया तो जज सब कुछ समझ गया। संयोग से ये जज भी उन्हीं संत के शिष्य थे जिन्होंने स्टेशन मास्टर को सत्य बोलने का मंत्र दिया था।


जज ने कहा, आप सही रास्ते पर हो, काश मैं भी ऐसा कर पाता। जज ने स्टेशन मास्टर पर जुर्माना लगाकर रिहा कर दिया। स्टेशन मास्टर की नौकरी चली गई। दोस्तों परिवार ने पागल समझ्कर नाता तोड़ दिया। वे किराये के कमरे में रहकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे, लेकिन वे सत्य के संकल्प पर टिके रहे। 1 दिन स्टेशन मास्टर को सरकारी टेलीग्राम आया, जिसमें लिखा था आपके पिता के पास जमीन का एक बड़ा टुकड़ा था, जिसे सरकार ने कब्जे में ले लिया था।


आप सरकार आपको मुआवज़े में ₹13,00,000 दे रही है। स्टेशन मास्टर तो जमीन के बारे में जानता भी नहीं था। उसने कैलेंडर देखा तो आज तीन महीने पूरे हो गए थे। वो समझ गया कि तीन महीने झूट ना बोलने का इनाम मुझे मिला है। वो अपनी पत्नी और बच्चों के पास गया और मुआवज़े की रकम सौंपती। पत्नी और बच्चों ने साथ रहने को कहा तो स्टेशन मास्टर ने कहा मैंने जीवन में बहुत झूठ बोला। मेरे जीवन में नीरसता थी, हमेशा डर लगता था, मैंने हंसना छोड़ दिया था।


लेकिन जब से सच बोला है, मैं कठिनाई के बीच में भी खुश रहता हूँ। किसी बात का डर नहीं बचा। तीन महीने छूटना घुलने से इतना फायदा होता है, ये मैंने देख लिया। अब मैं ये जानना चाहता हूँ की अगर मैं जीवनभर झूठ ना बोलू सत्य की राह पर चलूँ तो कितना फायदा होगा। तुम लोग इस कठिन रास्ते पर नहीं चल पाओगे इसलिए तुम ये पैसे रखो और अपना जीवन बनाओ। ठीक इसी समय स्वामी रामा के गुरु एक बार फिर हंसने लगी और स्वामी रामा से बोले तुम जानते हो क्या हुआ?


पांच स्टेशन मास्टर ने सब कुछ खोकर भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। आज उसने सत्य की शक्ति को जान लिया। ये एक महान जीवन का आरंभ है। ऐसा व्यक्ति जहाँ भी रहेगा लोगों के लिए प्रेरणा और शक्ति का स्रोत बनेगा।


दोस्तों, इस कहानी से दो बातें हम सीख सकते हैं पहला खुद से सत्य बोलो हम सबकी परेशानी का कारण है कि हम खुद से झूठ बोलते हैं, खुद अपने शब्दों पर विश्वास नहीं करते इसलिए खुद को कमजोर कर लेते है। अगर मैंने एक लक्ष्य ठान लिया तो उसके लिए सबकुछ दांव पर लगा दूंगा। हर कीमत पर लक्ष्य पर पहुँचकर रहूंगा। इस तरह से सोचना, बोलना और कर्म करना सत्य है। दूसरी बात, संकल्प शक्ति जिसने भी कठिन कार्य किये हैं।


उन्होंने संकल्प शक्ति के रूप में इसी सत्य की शक्ति का प्रयोग किया है। स्वामी रामा कहते है की संकल्प शक्ति से जुड़ने के लिए विचारों, शब्दों और कार्यों को शुद्ध करना जरूरी है। इसलिए जो भी करो उसे पूर्ण ईमानदारी और विश्वास से करो।


दोस्तों आप खुद देखो अपने जीवन में हमने आज तक जो भी सार्थक काम किया है उसे पूरी तरह डूबकर किया है, उस पर पूरी तरह विश्वास किया है तभी वो सफल हो पाया है।


तीसरी बात इच्छा स्वामी रामा कहते हैं कि अगर ये शक्ति को जानना है तो अपने अंदर तीव्र इच्छा पैदा करनी होगी और इस इच्छा को जागृत रखना होगा। बाकी रास्ता खुद ब खुद निकल आएगा। हमेशा खुद से सत्य बोलो, बुरे विचार न कार फेंको, अपने शब्दों पर पूर्ण विश्वास करके देखो, उन्हें कर्मों में बदलो। संकल्प शक्ति ही आत्मा की शक्ति है। स्वामी रामा कहते हैं, देर सवेर आपका जीवन पूरी तरह बदल जाएगा।


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