यह साथ आते आज ही छोड़ दें| Stop Thease 7 things from today | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales

यह साथ आते आज ही छोड़ दें| Stop Thease 7 things from today | hindi kahaniya | moral stories | hindi fairy tales
दोस्तो आज की इस कहानी में आप सभी का स्वागत है | आज की इस कहानी का नाम है - यह सात आदतें आज ही छोड़ दें | अगर आपको hindi kahaniya, moral stories, hindi stories, hindi fairy tales पढ़ने का शौक है तो इस कहानी को पूरा जरूर पढ़े|



दिमाग और मन को चुस्त रखने के लिए शरीर को थका ना बहुत ज़रूरी होता है। ये तो हम सभी जानते होंगे क्योंकि जब भी हम कोई खेल खेलते हैं या कोई शारीरिक गतिविधि करते हैं तो हमारा मन चुस्त हो जाता है। हमारा दिमाग तेज हो जाता है, सक्रिय हो जाता है। लेकिन इसके अलावा क्या क्या तरीके हो सकते हैं जो हमारे मन और हमारे दिमाग को सुस्त कर देते हैं? ऐसी कौन कौन सी बुरी आदतें होती हैं जो हमारे दिमाग और हमारे मन को अंदर तक खा जाती है?

हमारा दिमाग हमेशा थका थका महसूस करता है। तो आज की इस कहानी में हम इन्हीं बुरी आदतों के बारे में जानेगे और साथ ही वो आदतें भी जानेगे जिनसे हम अपने मन और अपने दिमाग को हमेशा के लिए सुस्त और सक्रिय बना सकते हैं। एक बार एक पिता अपने नौजवान बेटे को अपने साथ लेकर एक गुरु के आश्रम में पहुंचा। नौजवान युवक की चाल ढाल से ये प्रतीत हो रहा था की ये बहुत दिनों से थका हुआ है। उसके चेहरे पर उदासी के भाव थे। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे बन चूके थे। उसके ज्यादातर बाल या तो जड़ चूके थे या फिर सफेद हो चूके थे। उसे देखने पर ही ऐसा प्रतीत होता था कि पूरी दुनिया की चिंता इसी के सर पर है। आश्रम के बगीचे को पार करते हुए वो पिता अपने बेटे को लेकर उस गुरु के पास पहुंचा। उस नौजवान युवक को देखते ही गुरु ने पूछा कि इस बच्चे की ऐसी हालत क्यों है? क्या इसे कोई सदमा पहुंचा है? क्या इससे कोई तकलीफ या कोई सारी रिक बिमारी है?

आखिर कारण क्या है? ये नौजवान हैं लेकिन ये अपनी उम्र से बहुत ज्यादा लग रहा है। उस नौजवान युवक के पिता ने गुरु को प्रणाम करते हुए बताया कि गुरु जी यही तो मेरी चिंता का विषय है। इससे कोई दुख नहीं है। कोई सदमा नहीं पहुंचा और ना ही इसे कोई शारीरिक बिमारी है। लेकिन इसके बावजूद सारी सुख सुविधाएं इसके पास होते हुए भी ये हमेशा थका थका रहता है। किसी काम में इसका मन नहीं लगता। अगर ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में इसे कोई

शारीरिक बिमारी जरूर हो जाएगी। इसीलिए इससे मैं आपके पास लेकर आया हूँ। कृपया करके कुछ तरीका बताएं जिससे ये अपने जीवन को पूरी मस्ती के साथ जीना सीख जाएं। हमें इससे कुछ भी नहीं चाहिए। हम चाहते हैं कि बस ही अपना जीवन अच्छे तरीके से जीएं। गुरु ने उस युवक को समझाते हुए कहा कि इंसान जाने अनजाने अपने जीवन में कुछ ऐसी आदतें पाल लेता है जो उसके मन को थका देती है।

उसके शरीर में पल से भर देती है। इसके बाद वो चाहकर भी किसी काम में मन नहीं लगा पाता। सबसे पहली आदत तो एक बच्चे को उसके माँ बाप से मिलती है। जब माता पिता अपने बच्चे की सारी इच्छाएं पूरी करते जाते है, उसे कोई कमी महसूस नहीं होने देते तो धीरे धीरे बच्चे को लगने लगता है कि मेरे पास तो सारी चीजें हैं। मुझे कुछ करने की जरूरत ही क्या है? हद से ज्यादा माँ बाप का प्यार एक बच्चे को बिगाड़ देता है। अपने बच्चे से प्यार करो। उसकी इच्छाएं पूरी करो, लेकिन उसे ये भी एहसास कराओ की जिंदगी में बिना कुछ मेहनत के कुछ भी नहीं मिलता। इसीलिए उसकी सारी इच्छाएं पूरी मत करो। कुछ इच्छाएं अधूरी छोड़ दो ताकि उसे ये पता रहे कि जिंदगी में कुछ पाना भी होता है। सब कुछ करा कर आया नहीं मिलता।

दूसरी बड़ी आदत जो एक मन को थका थका सा महसूस कराती रहती है वो है हद से ज्यादा मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल। गुरु ने अपनी बात समझाते हुए कहा। कि विज्ञान दोधारी तलवार की तरह होता है। हम उसे अपनी उन्नति के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं और अपनी बर्बादी के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए एक चाकू सब्जी काटने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है और दूसरों का गला काटने के लिए भी उसी तरह से मोबाइल फ़ोन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उसमें आप चाहें तो अपनी उन्नति के लिए वो सारी चीजें देख सकते हैं जो एक इंसान को अपना काम करने में उसकी सहायता कर सकती है या फिर आप बेफिजूल की चीजे देखते हुए

अपना सारा समय मोबाइल फ़ोन को देखते हुए बर्बाद कर सकते हैं। आपने कभी ख्याल किया हो कि जब भी आप अपना मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते हैं तो आपको पता भी नहीं होता कि आप क्या देखने के लिए मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपके सामने जो कुछ आता जाता है आप उससे ही देखते जाते हैं और यही आपके समय को बर्बाद करता चला जाता है। आखिर में आप पाते हैं कि आपका दिमाग और आपका मन पूरी तरह से थक चुका है।

इसीलिए मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल सीमित समय के लिए ही करे। मनोरंजन के लिए दूसरे विकल्प चुनें, कोई खेल खेले जिससे आपकी शारीरिक गतिविधि या हो जिससे आपका शरीर थके जिससे कि आपका मन सुस्त रह सके। मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल कुछ सीखने के लिए ही करें। अपने मनोरंजन या अपने समय को बर्बाद करने के लिए हरगिस इसका इस्तेमाल ना करें वरना ये मोबाइल फ़ोन आपकी ज़िन्दगी का बहुत सारा समय। कहा जाएगा।

तीसरी बड़ी आदत जो एक मन को थका देती है वह है सही समय पर नींद ना लेना और पूरी नींद ना लेना। कुछ लोगों की तो काम की वजह से मजबूरियां होती है कि वो रात में देर तक जागते रहते हैं। लेकिन कुछ लोग यूं ही बेवजह या तो मोबाइल फ़ोन को देखते हुए या किसी से बात करते हुए अपनी रात्रि का बहुत सारा समय यूं ही बर्बाद कर देते हैं। जो समय सोने के लिए निर्धारित किया गया था वो समय वो जागने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। और फिर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में वो जाग नहीं पाते हैं। इसी वजह से उनका पूरा दिन थकान से भरा हुआ रहता है। लेकिन अगर आप सही समय पर भरपूर नींद ले पाते हैं तो आप ब्रह्म मुहूर्त में उठ पाएंगे और ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद आपका पूरा दिन यकीन मानिए। चुस्ती और स्फूर्ति से भरा रहेगा।

चौथा बड़ा कारण जो आपके मन की थकावट का कारण बनता है वो है एक लक्ष्य निर्धारित ना होना। अक्सर लोग दूसरों से प्रभावित होकर अपने लक्ष्य बदलते रहते हैं। अगर किसी दूसरे आदमी ने किसी काम में सफलता हासिल कर ली तो हम भी उसी काम को करने के पीछे दौड़ने लगते हैं। हम ये भूल जाते हैं कि हमारा हुनर कुछ अलग है और जब आप दूसरों से प्रभावित होकर कोई काम करने लगते हैं तो आपको उसमें सफलता नहीं मिलती और कुछ समय बाद आप निराश हो जाते हैं। ऐसे ही दो चार कार्यों में असफल होने के बाद आदमी को लगता है कि मेरे अंदर कुछ भी हुनर नहीं है। मैं किसी काम के लिए नहीं बना।

और उसके बाद उसका किसी काम को करने में दिल नहीं लगता। अगर कोई आदमी अपनी रुचि और अपने हुनर के हिसाब से अपना लक्ष्य निर्धारित करता है तो वो जीवन में कभी भी नहीं थकेगा। वो काम उसके लिए मज़ा बन जायेगा। उसके लिए ध्यान बन जाएगा और वो उस काम को बड़ी फुर्ती के साथ जीवनभर करता रह सकता है।

गुरु ने पांचवीं बड़ी आदत के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि जब इंसान सस्ते मनोरंजन ढूंढ लेता है।

जो भी उसका मन थका थका महसूस करने लगता है, सस्ते मनोरंजन जैसे कि मोबाइल फोन्स, *** ***** इत्यादि। जब भी आदमी इनकी गिरफ्त में आता है और सारिक गतिविधियाँ छोड़ देता है, शारीरिक मनोरंजन छोड़ देता है। शारीरिक मनोरंजन यानी की कोई खेल जिससे हमारे शरीर में से पसीना निकले, हमारी ग्रंथियाँ फिर से जाग उठे, सुस्त हो जाए इसी लिए सस्ते मनोरंजन की बजाय ऐसे मनोरंजन चुनें जिसमें आपको शारीरिक श्रम करना पड़े।

छठी बड़ी आदत के बारे में जिक्र करते हुए गुरु ने बताया कि जो इंसान दूसरे की उन्नति से जलता है, ईर्ष्या करता है, वो इंसान अपने आपका अंदर से पतन कर लेता है। किसी करीबी इंसान को कामयाब होते देख या तो हम उससे प्रेरणा ले सकते हैं या फिर उससे जलन पैदा कर सकते हैं। ये हमारे ऊपर निर्भर करता है। इसीलिए दूसरों से जलने की बजाय उनसे प्रेरणा लेना सीखें। प्रेरणा लेकर उनसे भी अच्छा काम करने के लिए।

खुद को प्रेरित करते रहे। जले मत, ईर्ष्या मत करे इर्षा मन का घाव होता है जो हमारे मन को अंदर से खा जाता है। सातवीं बड़ी आदत जो हमारे मन को हमारे दिमाग को निचोड़ कर रख देती है, वो है हमारे खाने पीने की आदत। आजकल लोग ऐसी ऐसी चीजें खाते हैं जो हमारे शरीर के लिए बिल्कुल भी लाभदायक नहीं होती है। ज्यादा तला हुआ खाना बाजारों खाना हमारे शरीर को फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचाती है। सिर्फ अपनी जीभ के स्वाद के लिए आप अपने शरीर को कुर्बान कर रहे हैं और अगर आपका शरीर एक बार अस्वस्थ हो गया तो आपका मन और आपका दिमाग हमेशा हमेशा के लिए थका थका महसूस करते रहेंगे। इसीलिए न् न खाएं, फल खाएं, हरी हरी सब्जियां खाएं। खाने के लिए इतनी सारी चीज़े है तो सिर्फ अपने जीव के 2 मिनट के स्वाद के लिए हम अपने शरीर को स्वस्त करने पर क्यों तुले हुए हैं?

ज़रा सोचिए अच्छा खाना खाएं में भरे रहे में भरे रहे। आखरी बड़ी आदत के बारे में चर्चा करते हुए गुरु ने बताया कि जो लोग अपने भविष्य है या फिर अपने अतीत में अटके होते हैं, वो लोग आज मैं कभी भी नहीं जी पाते हैं और जीवन तो आज में जीने का नाम है। कल को अगर कुछ बुरा हो जाता है, कुछ भी गलत हो सकता है। आपकी जान भी जा सकती है तो आप ये नहीं सोचेंगे कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? आपको वो पल याद आएँगे।

जो आपको जीने के लिए मिले थे, जो आपने गंवा दिए ऐसे ही बर्बाद कर दिए। चिंता में, फिक्र में और वो फिक्र किसी काम की नहीं थी क्योंकि किसी पल भी कुछ भी हो सकता है, चाहे हम कितनी भी योजनाएं कर लें, चाहे अतीत के बारे में कितना भी सोच ले। हम उसे बदल नहीं सकते हैं और जीस चीज़ को हम बदल नहीं सकते हैं जो हमारे हाथ में ही नहीं है। उसके बारे में सोच सोचकर हम अपने आप को क्यों बर्बाद कर रहे हैं? हमारे हाथ में है कुछ पल आज के कुछ पल अभी के कुछ पल जिनको हम जी सकते हैं या फिर उनको चिंताओं में बर्बाद कर सकते हैं। वर्तमान में जीने का नाम ही जिंदगी है और अगर आपने वर्तमान में जीने की आदत डाल ली तो आपका मन इतना स्फूर्ति और इतनी ताजगी के साथ भर जाएगा। वो दुनिया आपको दिखेगी जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। सिर्फ एक छोटी सी आदत वर्तमान में जीने की आदत आपका पूरा जीवन बदल सकती है।

आखिर में उस नौजवान युवक के सर पर हाथ फेरते हुए गुरु ने कहा की अब भी कुछ नहीं बिगड़ा। बेटे, पूरा जीवन तुम्हारे सामने है, जो बीत गया उसका अफसोस मत करो, वो बदल नहीं सकता है, लेकिन आज अभी तुम अपने जीवन को बदल सकते हो, उसके बारे में नई सोच पैदा कर सकते हो। अपने भविष्य के लिए एक नई दुनिया बना सकते हो तो आज से ही अपने जीवन के बारे में सकारात्मक सोचना शुरू कर दो। तुम्हारा जीवन कुछ समय में ही बदल जाएगा। तुम्हारा मन और तुम्हारा दिमाग फिर से सुस्ती से भर जाएगा। फिर से स्फूर्ति लौटाएगी। अपने आप को ये विश्वास दिलाओ, सकारात्मकता लाओ अपने अंदर और फिर देखो जीवन किस तरह बदलता है। भक्तजनों अगर आपको भी गुरुदेव की चर्चा पसंद आयी आप उससे सहमत हैं। आप उससे सहमत हैं तो कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं और अगर किसी और विषय में आपको जानकारी चाहिए तो कमेंट्स में वो भी लिख कर बताए तो मिलते है। किसी अगली कहानी में तब तक के लिए अपना ख्याल रखें।

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